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चन्दौली पुलिस की हेरोइन तस्करी पर ज़ोरदार चोट

50 लाख का जहर जब्त, लेकिन हत्यारों पर सवाल बरकरार?

चन्दौली जिले की मुगलसराय पुलिस ने 12 अप्रैल 2026 को नशे के सौदागरों के खिलाफ़ ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया। बाराबंकी के दो कुख्यात तस्करों को गिरफ्तार कर लगभग 400 ग्राम शुद्ध हेरोइन बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। यह वाराणसी रूट पर ड्रग तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने वाली पुलिस की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति का शानदार उदाहरण है। 

तस्करों का काला इतिहास उजागर
मुख्य आरोपी गंगाराम वर्मा (ग्राम नेउला, थाना मसौली, बाराबंकी) ग़ाज़ीपुर में NDPS एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के कई मुकदमों का संदिग्ध है। वह ड्रग तस्करी के बड़े सरगना के रूप में कुख्यात रहा है, जबकि उसका साथी नीरज वर्मा (पुत्र राम प्रसाद वर्मा) सौदों को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाता था। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि बाराबंकी से एक 'अनजान व्यक्ति' के इशारे पर हेरोइन लादकर मुगलसराय के पड़ाव चौराहे पर खरीदार को डिलीवर करने आए थे। यह खुलासा एक बड़े ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करता है, जो उत्तर प्रदेश से वाराणसी होते हुए अन्य राज्यों तक फैला हुआ प्रतीत होता है। 

सब्ज़ी के झोले में छिपा था घातक जहर
तस्करों ने चालाकी से हेरोइन को ताज़ा सब्ज़ियों के नीचे सब्ज़ी के झोले में छिपाया था, ताकि चेकिंग के दौरान आसानी से पार हो जाए। मुखबिर की फुर्तीली सूचना पर मुगलसराय पुलिस ने जाल बिछाया और चौराहे पर दोनों को दबोच लिया। सब्ज़ी का झोला और ताज़ा सब्ज़ियाँ। यह ट्रिक ड्रग माफिया की नई चालबाज़ी को दर्शाती है, जो रोज़मर्रा की चीज़ों से बचने की कोशिश करते हैं। 

पुलिस टीम की बधाई और कानूनी कार्रवाई
मुकदमा मु0अ0सं0 165/2026, धारा 8/21 NDPS Act के तहत मुगलसराय थाने में दर्ज हो चुका है। पूछताछ जारी है, जिसमें बड़े नेटवर्क के सुराग मिलने की उम्मीद बनी हुई है। कार्रवाई में अपर पुलिस महानिदेशक पीयूष मोर्डिया, पीयूष कृष्ण, एसपी आकाश पटेल, अपर एसपी अनन्त चन्द्रशेखर, क्षेत्राधिकारी अरूण कुमार सिंह के निर्देशन में थानाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह, उ0नि0 अजय कुमार (चौकी प्रभारी जलीलपुर) और उ0नि0 मनोज कुमार तिवारी ने सराहनीय भूमिका निभाई।

हत्याकांडों के परिजनों का दर्द अनसुलझा
यह सफलता नशे के ख़िलाफ़ जंग को मज़बूत करती है, लेकिन चन्दौलीवासियों के दिल में राजकुमार यादव उर्फ मुट्टुन यादव (2025 हत्याकांड) और रोहितास पाल (2025 हत्याकांड) के असली हत्यारों का कांटा खटक रहा है। रोहितास पाल हत्याकांड में साजिशकर्ता गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन मुख्य शूटर 50 दिन बाद भी फरार हैं—9 स्पेशल टीमें और एसटीएफ के बावजूद। 

परिजन न्याय के लिए तड़प रहे हैं: "कब तक इंतज़ार करें? क्या हमारे बच्चों का ख़ून सस्ता है?" क्या पिंटू पाल के सवाल अनुत्तरित रहेंगे, या पुलिस इन हत्यारों पर भी ऐसी ही चोट करेगी? यह चुनौती पूरे सिस्टम के लिए है। 

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