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चंदौली के नौगढ़ में धूमधाम से शुरू हुआ 'स्कूल चलो अभियान', बच्चों के नारों से गूंजे गांव

नौगढ़ (चंदौली), 1 अप्रैल 2026: जिला शासन के निर्देश पर कंपोजिट विद्यालय जयमोहनी, नौगढ़ तहसील में 'स्कूल चलो अभियान' का भव्य शुभारंभ हुआ। विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के अध्यक्ष श्री लालवर्ती ने पुण्य वर्षा और मिष्ठान वितरण कर बच्चों व अभिभावकों का स्वागत किया, जिससे गांव की गलियां बच्चों के जोशीले नारों से गूंज उठीं।

यह अभियान नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत का प्रतीक है, जो उत्तर प्रदेश सरकार की 'स्कूल चलो अभियान' पहल का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में यह अभियान हर साल अप्रैल में शुरू होता है, जिसके तहत ड्रॉपआउट दर को कम करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष ऐसे अभियानों से 2 लाख से अधिक बच्चों को स्कूलों से जोड़ा गया। चंदौली जिले में प्राथमिक शिक्षा की सकल नामांकन दर (GER) 95% से ऊपर पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत (93%) से बेहतर है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्री प्रियधेश कुमार ने भव्य आयोजन किया। उन्होंने SMC अध्यक्ष श्री लालवर्ती सहित सभी सदस्यों का स्वागत किया और सफल छात्रों को अगली कक्षा में प्रवेश की सूचना दी। खबर मिलते ही बच्चे खुशी से झूम उठे। अगली कक्षा में पहुंचकर उन्होंने मिठाइयां बांटीं और प्रधानाध्यापक जी ने उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत ऐसे अभियानों में लड़कियों का नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया गया है। चंदौली जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की ड्रॉपआउट दर 10% से घटकर 5% रह गई है, जो अभियान की सफलता का प्रमाण है।

प्रधानाध्यापक के निर्देश पर बच्चों ने उल्लासपूर्ण रैली निकाली। गांव की गलियों में नारे गूंजे:
लड़का-लड़की एक समान, यही संकल्प यहीं उदान।
हम बच्चों का नारा है, शिक्षा अधिकार हमारा है।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई; मिलकर सबका पढ़ाई।

शिक्षा मित्र श्री रामचंद्र राम ने विद्यालय की सभी सुविधाओं—जैसे मिड-डे मील, शौचालय, पीने का पानी और डिजिटल क्लासरूम—का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षण प्रक्रिया को तीव्र और गुणवत्तापूर्ण बनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक श्री प्रियधेश कुमार, जितेंद्र शर्मा, कुमार मंगलम, रामचंद्र राम (शिक्षा मित्र) सहित गांव के संभ्रांत नागरिक, अभिभावक और बच्चे उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल नामांकन बढ़ाने बल्कि समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाला साबित हुआ।

भारत में प्राथमिक स्तर पर नामांकन 98% है, लेकिन नियमित उपस्थिति केवल 80%। ऐसे अभियान उपस्थिति को 90% तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं, जैसा कि यूनिसेफ के हालिया सर्वे में पाया गया।

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