चंदौली। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने चंदौली जिले को एक ऐतिहासिक तोहफा दिया है। लगभग तीन दशक की प्रतीक्षा के बाद, जिला मुख्यालय पर पीपीपी मॉडल से 35 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक रोडवेज बस डिपो का निर्माण अब हकीकत बनने जा रहा है। यह परियोजना न केवल स्थानीय परिवहन को क्रांतिकारी रूप देगी, बल्कि 'विकसित उत्तर प्रदेश 2047' के सपने को मूर्त रूप प्रदान करेगी।
परियोजना का भव्य खाका: आधुनिकता का पूरा पैकेज
चंदौली जिला मुख्यालय पर बनने वाला यह बस डिपो उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के तहत विकसित होगा। 4.17 एकड़ कृषि विभाग की जमीन पर फैलेगी यह सुविधा, जिसमें शामिल होंगे:
16 बस बे – तेज बस परिचालन के लिए। 22 पार्किंग स्लॉट – पार्किंग की किल्लत खत्म।
ईवी बस पार्किंग – इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अलग स्पेस, पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा।
वर्कशॉप, वॉशिंग स्टेशन और फ्लोर स्टेशन – रखरखाव की सभी आधुनिक सुविधाएं एक छत के नीचे।
यह डिपो चंदौली को वाराणसी, प्रयागराज और अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने में गेम-चेंजर साबित होगा, जिससे यात्रियों को सुविधा के साथ-साथ समय की बचत होगी। पहले प्रस्तावित लागत 22-25 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 35 करोड़ हो गई – गुणवत्ता और विस्तार का प्रमाण।
विधायक रमेश जायसवाल की मेहनत का कमाल
मुगलसराय (डीडीयू नगर) विधायक रमेश जायसवाल के अथक प्रयासों ने इस सपने को साकार किया। उन्होंने अधिकारियों संग जमीन का स्थल निरीक्षण किया और शासन से मंजूरी दिलाई। उनकी सक्रियता से प्रस्ताव न केवल आगे बढ़ा, बल्कि इसे हाईटेक स्तर पर ले जाकर चंदौलीवासियों का दिल जीत लिया।
28 साल का इंतजार समाप्त: व्यापक योजना का हिस्सा
1997 में जिला बने चंदौली को 28 वर्ष बाद अपना पहला स्वतंत्र बस डिपो मिलेगा – एक मील का पत्थर। UPSRTC के एमडी प्रभु एन सिंह ने नवंबर 2025 में DPR को प्रारंभिक मंजूरी दी थी। यह परियोजना राज्य की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसमें 49 बस स्टेशनों को पीपीपी मॉडल पर हाईटेक बनाया जाएगा। इससे नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटन फलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलेगी। यह बस डिपो चंदौली को परिवहन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है – अब बसों की होड़ लगेगी, लेकिन व्यवस्था चकाचौंध।
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