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सकलडीहा पी.जी. कॉलेज: बी.एड. छात्रों का लोक संस्कृति का धमाकेदार जश्न—प्रेरणा की बौछार

चंदौली, 16 अप्रैल 2026: सकलडीहा पी.जी. कॉलेज के बी.एड. चतुर्थ सेमेस्टर के स्काउट-गाइड प्रशिक्षुओं ने आज एक ऐसा सांस्कृतिक धमाका किया कि दर्शक झूम उठे। पारंपरिक लोकगीतों, नृत्यों और रंग-बिरंगे वेशभूषा में लिपटे युवाओं ने स्टेज पर जादू बिखेरा, मुख्य अतिथि से लेकर हर कोने तक का दिल जीत लिया। यह न सिर्फ उत्सव था, बल्कि भारत की लोक धरोहर को संरक्षित करने की जीवंत प्रेरणा।

कार्यक्रम सरस्वती वंदना से शुरू हुआ, जिसने माहौल को दिव्य बना दिया। स्वागत गीत के बाद लोकगीतों और नृत्यों की बाढ़ आ गई—भंगरा की थिरकन, रासलीला की मस्ती और बुंदेली होली के जोश से गूंजता स्टेज। उत्तर प्रदेश की मिट्टी की खुशबू फैलाते युवा, दर्शकों की तालियों की बौछार में डूबे—पूरे कॉलेज में उत्सव का सैलाब।

मुख्य अतिथि का दिल छूने वाला संदेश
प्रख्यात संगीतकार व पर्यावरणविद् डॉ. कृष्णकांत शुक्ला ने कहा, "हमारी लोक संस्कृति अनमोल खजाना है—इसे सहेजना हमारा कर्तव्य!" उन्होंने युवाओं से अपील की कि इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। 

खास बात: उनकी लोक-प्रेरित रचनाएं पर्यावरण जागरूकता फैलाती हैं, जो कार्यक्रम को और गहरा अर्थ देती हैं।
प्राचार्य की सराहना ने जगाई नई उमंग
अध्यक्षता करने वाले प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने प्रशिक्षुओं की तारीफ की: "शिक्षक बनना सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, सांस्कृतिक मूल्यों का संवर्धन है। ऐसे आयोजन सर्वांगीण विकास की कुंजी हैं।" उनके शब्दों ने छात्रों में जोश की लहर दौड़ा दी।

चमकदार संचालन व विशेष आकर्षण
स्वागत भाषण डॉ. अजय कुमार सिंह यादव का, धन्यवाद डॉ. इंद्रजीत सिंह का। कुशल संचालन महेंद्र कुमार ने किया। प्रमुख अतिथि: प्रो. इंद्रदेव सिंह, प्रो. दयानिधि सिंह यादव, प्रो. दयाशंकर सिंह यादव, प्रो. विजेंद्र सिंह, डॉ. श्याम लाल यादव समेत अनेक प्राध्यापक। यह जश्न साबित करता है—सकलडीहा के युवा पढ़ाई के साथ संस्कृति के रक्षक भी। लोक धरोहर को जीवित रखने का संकल्प लें?

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