चंदौली। जिले की सड़कें इन दिनों मौत का खुला खेल बन चुकी हैं। मारूफपुर चहनियाँ सकलडीहा से चंदौली भारी वाहनों का राज शुरू हो गया है। अधर में लटकी सड़क परियोजनाएं, गड्ढों से भरी राहें और पुलिस की लापरवाही ने हादसों का सिलसिला थमा ही नहीं रहा। 7 मई को सकलडीहा मार्ग पर एक हाइवा ट्रेलर ने बाइक सवार महिला को कुचल दिया—मौके पर ही दर्दनाक मौत। पिछले एक माह में इसी रूट पर 7 से ज्यादा हादसे, 4 जिंदगियां लील चुकीं। अब ग्रामीण और व्यापारी जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर चिल्ला रहे हैं: "भारी वाहनों पर पूर्ण रोक, टूटे मकानों का मुआवजा दो।"
सकलडीहा हादसा: मायके से लौटते ही कुचली गई मां
सकलडीहा-चंदौली मुख्य मार्ग पर दोपहर का वक्त था। रवि कुमारी (पत्नी विकास कुमार, निवासी बर्थरा; पुत्री स्व. धर्मराज चौहान, तेंदुई) मायके से बाजार लौट रही थीं। अचानक 50 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ता हाइवा ट्रेलर ने उनकी बाइक को ठोक दिया। चश्मदीदों का कहना, "चालक ने ब्रेक तक नहीं लगाया, सीधे फरार।" पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन आरोपी अभी फरार। यह मारूफपुर बैरियर हटने के बाद तीसरा बड़ा हादसा है, जहां भारी वाहनों ने छोटे वाहनों को निशाना बनाया। स्थानीय डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसी दुर्घटनाओं में 70% मौतें तेज रफ्तार और ब्रेक न लगाने से होती हैं।
बैरियर हटने की रहस्यमयी गुत्थी: स्पीड 50 किमी बढ़ी
प्रशासन ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मारूफपुर बैरियर उखाड़ फेंके। इनका मकसद था भारी वाहनों को चेक करना, स्थानीय सड़कों पर घुसपैठ रोकना। अब सकलडीहा, चहनियां जैसे इलाकों से रोज दर्जनों ट्रक-हाइवा बिना रुके उड़ान भर रहे। ट्रैफिक विशेषज्ञ डॉ. आर.के. सिंह कहते हैं, "बैरियर से पहले स्पीड 20-30 किमी/घंटा सीमित थी, अब 40-50 किमी बढ़ गई। नतीजा? हादसे दोगुने!" जिले में पिछले तीन माह में भारी वाहनों से जुड़े 25 हादसे, 12 मौतें—यह आंकड़ा चंदौली पुलिस के रिकॉर्ड से।
अधूरी सड़कें: गड्ढों का जाल, भारी गाड़ियों का दबाव
सकलडीहा-चंदौली मार्ग पर खुदाई अधर में, गड्ढे-उबड़खाबड़ रास्ते खतरे की घंटी बजा रहे। भारी वाहनों का बोझ सड़क को चूर-चूर कर रहा। निर्माण एजेंसी पर ग्रामीणों का आरोप: "काम शुरू किया, लेकिन बैरियर हटाने की जल्दबाजी में सुरक्षा भूला दी।" रोचक तथ्य—राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के आंकड़ों से, अधूरी सड़कों पर हादसे 40% ज्यादा होते हैं।
व्यापारियों के टूटे मकान: मुआवजे की आस, भारी वाहनों पर रोक की मांग
सड़क निर्माण में व्यापारियों के मकान ध्वस्त हो गए, लेकिन मुआवजा अब तक लटका। किसान नेता पिंटू पाल चेताते हैं, "पुलिस कागजों पर नजर रखती है, सड़क पर पहरा हो भारी गाड़ियां उड़ान भर रही हैं।"
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया—मुख्य मांगें: सड़क पूरी न होने तक भारी वाहनों का प्रवेश बंद, टूटे मकानों का तत्काल मुआवजा। इससे हादसे रुकेंगे, इलाका सुरक्षित बनेगा।पुलिस पर सवाल, प्रशासन चुप
बलुआ पुलिस पर लापरवाही के तीर: न चेकपॉइंट, न ट्रैफिक पुलिस। एसपी चंदौली बोले, "जांच चल रही, दोषियों पर सख्त कार्रवाई होंगी। व्यापार मंडल अध्यक्ष कृष्णा सेठ ज्ञापन देकर बैरियर बहाली व यातायात मजबूत करने को कह रहे। अगर समय रहते कदम न उठे, तो चंदौली की सड़कें कब्रिस्तान बनेंगी।
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