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चंदौलीः क्राइम ब्रांच विवेचना सेल के इंस्पेक्टर विमलेश मौर्य निलंबित; जांच शुरू


चंदौली, 26 मई 2026 — चंदौली पुलिस में अनुशासनात्मक कार्रवाई की एक और बड़ी घटना सामने आई है। पुलिस अधीक्षक (SP) आकाश पटेल के निर्देश पर क्राइम ब्रांच विवेचना सेल में तैनात इंस्पेक्टर विमलेश मौर्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के पीछे आरोप है कि मौर्य ने एक संवेदनशील मामले की विवेचना को जानबूझकर लंबित रखा और अभियुक्त पक्ष से अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से विवेचना के दौरान विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप कराए।

एसपी कार्यालय ने जारी किए शॉर्ट नोट में बताया कि प्रारंभिक जांच में प्राप्त तथ्यों व दस्तावेजों से आरोप गंभीर प्रतीत होते हैं, इसलिए अनुशासनात्मक कसौटी के तहत तत्काल निलंबन आदेश पारित किया गया। निलंबन का आदेश लागू होते ही संबंधित अधिकारी को सेवाओं से अलग कर दिया गया है और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोप में कहा गया है कि आरोपी इंस्पेक्टर ने एक लंबित मुकदमे की जांच को जानबूझकर ठंडे बस्ते में रखा। विवेचना को प्रभावित करने के लिए अभियुक्त पक्ष की ओर से लिखवाए/प्रारूप कराए गए दस्तावेजों या प्रक्रियात्मक दखल के आरोप पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रारंभिक तथ्य जांच में मिले साक्ष्यों से यह अंदेशा पक्का हुआ कि किसी न किसी रूप में अनुचित लाभ लिया गया या लेने की कोशिश की गई। 

एसपी ने कहा है कि निलंबन के साथ ही जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अतिरिक्त निर्देश दिए गए हैं। जांच में आवश्यक पाए जाने पर यह मामला विभागीय न्यायिक प्रक्रिया (वेतनविहीन निलंबन/अनुभागीय जांच) और आपराधिक धाराओं के तहत भी आगे बढ़ सकता है। जांच के दायरे में संबंधित आरक्षक, दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड और संबंधित मुकदमों के फाइलों की भी पड़ताल की जाएगी।

प्रभावित पक्षों की प्रतिक्रिया
अब तक निलंबित अधिकारी विमलेश मौर्य की ओर से आधिकृत बयान उपलब्ध नहीं हुआ है। विमलेश मौर्य के कानूनी या व्यक्तिगत प्रतिनिधियों से स्पष्टीकरण मिलने पर उसे प्रकाशित किया जाएगा। वहीं, अभियुक्त पक्ष और पीड़ित पक्ष के संबंध में भी पुलिस ने कहा है कि जरूरी जानकारी जुटा कर दोनों पक्षों से पूछताछ की जाएगी।

पिछले कुछ महीनों में चंदौली पुलिस ने अनुशासनिक मामलों में सख्ती दिखाई है; यह किसी भी अनियमितता पर शून्य सहनशीलता नीति का संकेत है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा आम जनता के भरोसे को बचाए रखने के लिए अंदरूनी मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है।

जांच पूरी होने के बाद एसपी कार्यालय निष्कर्ष जारी करेगा और उसके आधार पर आवश्यक विभागीय या आपराधिक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय प्रशासन ने भी मामले पर नजर रखने का संकेत दिया है और कहा गया है कि यदि जांच में उच्च अधिकारियों के संलिप्तता के और संकेत मिले तो मामले को उत्तर प्रदेश पुलिस के स्वतंत्र जांच प्रकोष्ठ अथवा राज्य स्तर पर भेजने पर विचार किया जा सकता है।

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