प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन यदि कार्रवाई में ढिलाई बरतता रहा, तो सपा कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर व्यापक प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने मांग की कि कार्यकर्ताओं पर दर्ज फर्जी मुकदमों की निष्पक्ष जांच हो और निर्दोषों को तत्काल राहत दी जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन कुछ तत्वों के इशारे पर एसपी कार्यकर्ताओं को लक्षित कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है।
इस अवसर पर सकलडीहा से विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव ने कहा, "हमारा धैर्य अब सीमा पर है। यदि न्याय नहीं मिला, तो चकिया की सड़कें आंदोलन का मैदान बन जाएंगी। समाजवादी पार्टी क्षेत्रवासियों के हक के लिए लड़ती रहेगी।" पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट ने भी बोलते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यह उत्पीड़न राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान दर्जनों पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख पदाधिकारियों में ब्लॉक अध्यक्ष, जिला उपाध्यक्ष और अन्य नेता शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान नारे लगाए गए और सपा झंडे लहराए गए।
एसपी नेताओं ने कहा कि यदि अगले 48 घंटों में कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिसमें धरना, रोड ब्लॉक और विरोध मार्च शामिल होंगे। क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई और एसपी के पक्ष में समर्थन जताया।
प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन स्रोतों के अनुसार मामला संज्ञान में है। चकिया में एसपी का पारंपरिक वोटबैंक मजबूत होने के कारण यह आंदोलन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
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