जागरूकता कार्यक्रमों में महिलाओं को उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनमें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन‑स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन, पति की मृत्युपरांत निराश्रित महिला योजना, शक्ति सदन व सखी निवास प्रमुख हैं। साथ ही थानों पर स्थापित मिशन शक्ति केन्द्रों के कार्य, उद्देश्यों व सेवाओं—शिकायत‑निवारण, कानूनी मार्गदर्शन व आपात सहायता—के बारे में भी विस्तार से बताया गया ताकि महिला समुदाय केन्द्रित सेवाओं तक अधिक सुलभता से पहुँच सके।
कानूनी साक्षरता के हिस्से के रूप में ग्रामीण व शहरी महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम 2005, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिबन्ध व प्रतिशोध) अधिनियम 2013, दहेज निषेध अधिनियम 1961 (संशोधित 1986) तथा गर्भधारण‑पूर्व और प्रसव‑पूर्व निदान तकनीक (लिंग‑चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 के मुख्य प्रावधानों पर जागरूक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि इन कानूनों के बारे में जागरूकता बढ़ने से पीड़ितों को निवारण व राहत मिलने में मदद मिलेगी।
पुलिस ने बताया कि द्वितीय चरण में साइबर सुरक्षा जागरूकता पर विशेष बल दिया जाएगा। महिलाओं व बालिकाओं को सोशल मीडिया के सुरक्षित प्रयोग, ऑनलाइन फ्रॉड एवं साइबर अपराधों से बचाव के सरल उपाय सिखाए जाएंगे। पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने कहा, "हमारा उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान कर उनकी शिकायतों का त्वरित निवारण सुनिश्चित करना है।"
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