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58 गांवों के किसानों का ऐलान—"जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे

विंध्य एक्सप्रेसवे पर बढ़ा किसान आंदोलन, यूपीडा से वार्ता की मांग, सड़क से संसद तक पहुंची आवाज 

चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 11वें दिन भी जारी रहा। किसानों ने अपर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि परियोजना की जिम्मेदार संस्था यूपीडा (UPIDA) जिला प्रशासन की मौजूदगी में किसानों से वार्ता करे तथा बातचीत पूरी होने तक भूमि अधिग्रहण की सभी प्रक्रियाओं को तत्काल स्थगित किया जाए।
अपर जिलाधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और लगातार उनके संपर्क में बना हुआ है।
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक एवं भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने कहा कि लगभग 58 गांवों के किसान अपनी भूमि बचाने के लिए संघर्षरत हैं। उनका आरोप है कि प्रस्तावित 120 मीटर चौड़े विंध्य एक्सप्रेसवे के कारण चंदौली में करीब 35 किलोमीटर क्षेत्र की बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे अनेक किसान भूमिहीन हो जाएंगे।

किसानों का कहना है कि पहले से ही भारतमाला परियोजना के लिए बड़ी संख्या में किसानों की जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। ऐसे में इतनी कम दूरी पर एक और एक्सप्रेसवे का निर्माण किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक्सप्रेसवे के लिए ऐसे वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं, जिनसे परियोजना की लागत भी कम आएगी और किसानों की उपजाऊ भूमि का नुकसान भी न्यूनतम होगा। इस संबंध में उनके पास विस्तृत ब्लूप्रिंट भी मौजूद है।

किसानों ने सर्वे प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि परियोजना का सर्वे जिला प्रशासन की निगरानी में न होकर दिल्ली की एक निजी कंपनी द्वारा ड्रोन से कराया गया, जिसके कारण प्रस्तावित मार्ग कई स्थानों पर स्कूलों, आबादी, मंदिरों और उपजाऊ खेतों के बीच से गुजर रहा है। उनका कहना है कि सर्वे में गंभीर त्रुटियां हैं और इसकी पुनः समीक्षा की जानी चाहिए।

धरनारत किसानों ने चेतावनी दी कि यदि वार्ता से पहले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो गांवों में प्रशासन और किसानों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने मांग की कि जिला प्रशासन, यूपीडा और किसान प्रतिनिधि मिलकर वैकल्पिक मार्गों पर गंभीरता से विचार करें।

इस दौरान किसानों ने लोकसभा में चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा विंध्य एक्सप्रेसवे से किसानों को होने वाली समस्याओं का मुद्दा उठाने पर उनका आभार व्यक्त किया। किसान नेताओं ने कहा कि अब उनकी लड़ाई "सड़क से संसद तक" लड़ी जाएगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान, किसान महासभा के जिलाध्यक्ष श्रवण मौर्य, नगर अध्यक्ष राजीव मौर्य, महेश्वर सिंह एडवोकेट, विद्याशंकर सिंह, फिरोज, अजय तिवारी, श्यामजी, शिवशंकर त्रिपाठी, बनारसी चौहान, विनोद विश्वकर्मा, हरिशंकर त्रिपाठी, अवधेश तिवारी, अंगद तिवारी, जितेंद्र सिंह, ओमप्रकाश, नसीमुद्दीन अंसारी, रामनारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी है।

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