195 शिकायतें पहुंचीं, सिर्फ 16 का मौके पर निस्तारण, जमीन विवादों ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
सकलडीहा (चंदौली)। उत्तर सरकार भले ही संपूर्ण समाधान दिवस के माध्यम से जनता की समस्याओं का त्वरित निस्तारण कराने का दावा कर रही हो, लेकिन शनिवार को सकलडीहा तहसील में आयोजित समाधान दिवस ने जमीनी हकीकत भी सामने रख दी। बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने वर्षों से लंबित राजस्व विवाद, अवैध कब्जे और पुलिस की कार्यशैली को लेकर अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी। सबसे अधिक शिकायतें जमीन, पैमाइश और अतिक्रमण से जुड़ी रहीं, जिससे स्पष्ट हुआ कि राजस्व विवाद आज भी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं।
जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रतन कुमार वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक अनंत चंद्रशेखर, एसडीएम आकांक्षा सिंह, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा क्षेत्रीय थानाध्यक्ष मौजूद रहे।
समाधान दिवस में कुल 195 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, लेकिन मौके पर केवल 16 मामलों का ही निस्तारण हो सका, जबकि 179 शिकायतें जांच और कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेज दी गईं। सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित रहीं, जिनमें जमीन पर कब्जा, पैमाइश, सीमांकन, चकरोड पर अतिक्रमण और पुलिस प्रताड़ना के मामले प्रमुख रहे।
लगातार बढ़ते भूमि विवादों पर गंभीर रुख अपनाते हुए एडीएम (न्यायिक) रतन कुमार वर्मा ने लंबित मामलों पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिकायतों को फाइलों में दबाकर रखने की प्रवृत्ति बंद करनी होगी। फरियादियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन भूमि विवादों से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है, वहां राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर पैमाइश कराएगी और स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगी।अधिकारियों को ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए एक सप्ताह की समयसीमा भी तय की गई।
आमरण अनशन पर बैठे नायब तहसीलदार, अपने ही जनपद में न्याय की गुहार
समाधान दिवस के बीच एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे कार्यक्रम का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हमीरपुर जनपद में कार्यरत नायब तहसीलदार तथा भोजापुर निवासी हिम्मत बहादुर अपनी पैतृक भूमि पर कथित अवैध कब्जे के विरोध में तहसील परिसर में आमरण अनशन पर बैठे रहे। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि एक राजस्व अधिकारी को अपनी ही जमीन के मामले में न्याय के लिए अनशन करना पड़ रहा है, तो आम नागरिक की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी भूमि कब्जामुक्त नहीं कराई जाती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
आदेश के बाद भी नहीं हट रहा कब्जा, फरियादी ने सुनाई आपबीती
समाधान दिवस में पहुंचे हिनौता निवासी फरियादी श्रीराम कन्नौजिया ने भी अधिकारियों के समक्ष गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि अवर आयुक्त, वाराणसी द्वारा उनके पक्ष में आदेश पारित किए जाने के बावजूद लेखपाल, कानूनगो और स्थानीय पुलिस आदेश का पालन नहीं करा रही है। विपक्षी अब भी उनकी भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि न्याय की उम्मीद में वह कई बार तहसील और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन आज तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया।
जनता की उम्मीदें, प्रशासन की परीक्षा
समाधान दिवस में अधिकारियों ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। हालांकि बड़ी संख्या में लंबित शिकायतों और फरियादियों की नाराजगी ने यह संकेत भी दिया कि राजस्व और भूमि विवादों के मामलों में अभी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देश जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होते हैं और फरियादियों को वास्तव में न्याय कब तक मिल पाता है।
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