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"जब नायब तहसीलदार को ही नहीं मिला न्याय": अपनी जमीन के लिए सकलडीहा तहसील में आमरण अनशन पर बैठे हिम्मत बहादुर

भूमिधरी जमीन पर कब्जा दिलाने में एक साल से कार्रवाई नहीं होने का आरोप, लेखपाल पर रिश्वत लेकर दूसरे पक्ष को कब्जा दिलाने का दावा; डीएम-एसपी ने जांच टीम गठित की।

सकलडीहा (चंदौली)। जिस राजस्व व्यवस्था से आम लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद रहती है, उसी व्यवस्था के एक अधिकारी को अपनी जमीन के लिए आमरण अनशन पर बैठना पड़े तो यह पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हमीरपुर सदर में तैनात नायब तहसीलदार हिम्मत बहादुर, जो चंदौली जिले के नवही गांव के निवासी हैं, शनिवार को सकलडीहा तहसील परिसर में बैनर लगाकर आमरण अनशन पर बैठ गए।
हिम्मत बहादुर का कहना है कि उन्होंने मार्च 2025 में सेवखर कला गांव में लगभग सवा दो बिस्वा भूमिधरी भूमि खरीदी थी। भूमि पर कब्जा दिलाने के लिए उन्होंने जुलाई 2025 में धारा 30(2) के तहत आवेदन किया, लेकिन उनका आरोप है कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनकी पत्रावली का निस्तारण नहीं किया गया।



उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका यह भी दावा है कि संबंधित लेखपाल ने कथित रूप से रिश्वत लेकर दूसरे पक्ष को उनकी जमीन पर कब्जा करा दिया। हालांकि, इस आरोप की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अनशन पर बैठे नायब तहसीलदार ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी भूमि संबंधी समस्या का समाधान नहीं होगा और उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।

इधर, संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी सकलडीहा तहसील पहुंचे। उपजिलाधिकारी आकांक्षा सिंह ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सकलडीहा तहसीलदार अनुराग सिंह ने बताया कि शिकायत भूमिधरी भूमि पर कब्जे से संबंधित है। मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उधर, संबंधित लेखपाल का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ, इसलिए उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जब राजस्व विभाग का एक अधिकारी स्वयं अपनी भूमि के अधिकार के लिए धरने और आमरण अनशन का सहारा लेने को मजबूर हो जाए, तो आम नागरिकों को न्याय मिलने की व्यवस्था पर भी स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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