बिछिया (चंदौली)। विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में बिछिया धरना स्थल पर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन अब गांव-गांव फैलने लगा है। धरने के छठे दिन शनिवार को पिपरपतिया और हथियानी गांव के किसान 24 घंटे के सांकेतिक धरने पर बैठे और परियोजना वापस लेने की मांग दोहराई।
भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता एवं किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक मणि देव चतुर्वेदी ने कहा कि आंदोलन लगातार संगठित हो रहा है। विभिन्न गांवों के किसान बारी-बारी से एक-एक दिन धरने पर बैठकर परियोजना का विरोध दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों का स्पष्ट संदेश है कि जब तक विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना वापस नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरने पर मौजूद किसानों ने "जान देंगे, जमीन नहीं देंगे" और "जब तक परियोजना वापस नहीं, तब तक वोट नहीं" जैसे नारे लगाते हुए कहा कि वे अपनी उपजाऊ कृषि भूमि किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। किसानों का कहना है कि यह परियोजना उनकी आजीविका और खेती पर सीधा संकट बनकर सामने आई है।
धरने में विनोद यादव, सुनील यादव, नन्हे यादव, पंकज सिंह, बेचन विश्वकर्मा, गोपाल सिंह, नंदलाल, उपेंद्र यादव, प्रमोद यादव, रवि चौहान, छोटे सिंह, सदानंद सहित करीब 50 किसान शामिल रहे।
इस दौरान पूर्व ब्लॉक प्रमुख सदर अरविंद यादव भी धरना स्थल पहुंचे और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि चंदौली को प्रदेश का "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन जिले में पहले से मौजूद राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच अब एक्सप्रेस-वे का जाल बिछाया जा रहा है। यदि यही स्थिति रही तो जिले की उपजाऊ कृषि भूमि समाप्त हो जाएगी और किसान भूमिहीन होने को मजबूर हो जाएंगे।
अरविंद यादव ने विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना को किसानों के लिए "अभिशाप" बताते हुए जिले के सभी जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को पार्टी और सदन में प्रमुखता से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों और पूर्व प्रधानमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी के कृषि विकास के सपनों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा और जिले के अधिक से अधिक गांवों को इससे जोड़ा जाएगा।
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