स्थानीय निरीक्षण में मड़ई स्थित कंपोजिट विद्यालय समेत कई परिषदीय स्कूल बंद मिले। जिन स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए भी गए, वे केवल औपचारिकता तक सीमित रहे और आयोजन संकुचित पैमाने पर दिखे। कई स्थानों पर वरिष्ठ अध्यापक व स्टाफ मौजूद मिले, पर विद्यार्थियों की उपस्थिति घटती हुई दिखी, जिससे पौधरोपण और पर्यावरण संवर्धन संबंधी गतिविधियों का व्यापक कार्यान्वयन नहीं हो सका।
ग्रामीण नेतागण और अभिभावकों ने बीएसए के आदेशों के पालन के लिए ब्लॉक‑स्तर और स्कूल‑स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े सरकारी कार्यक्रमों में समुचित निगरानी और समय पर सूचना‑प्रसार न होने पर योजनाओं का उद्देश्य धूमिल हो जाता है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, "विद्यालयों में नियमित रूप से पौधरोपण और पर्यावरण शिक्षा होनी चाहिए — सिर्फ कागज़ों पर आदेश देने से कार्य नहीं होता।"
कुछ शिक्षकों ने रविवार होने के कारण अभिभावकों और बच्चों की अनुपस्थिति को कारण बताया, पर यह भी माना कि आयोजन से पहले समन्वय व सूचना का अभाव स्पष्ट था। बीएसए कार्यालय ने मामले पर फिलहाल सीमित प्रतिक्रिया दी और कहा कि स्थिति का संज्ञान लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। ज़िलाधिकारी स्तर से भी जांच की बात सामने आई है, पर अभी तक कोई दंडात्मक या सुधारात्मक कदम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया गया है।
शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रधानाध्यापक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और ग्राम पंचायत के बीच पूर्व नियोजन, समय पर सूचना‑प्रसार और स्थानीय निगरानी आवश्यक है। वरना शासन स्तर के निर्देश जमीन पर प्रभावहीन ही साबित होते रहेंगे।
0 टिप्पणियाँ