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संसद में छात्रों के अधिकारों की गूंज: चंद्रशेखर आजाद के ऐतिहासिक धरने से बढ़ा सरकार पर दबाव

नई दिल्ली। NEET परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में नगीना से सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने संसद परिसर में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष ऐतिहासिक धरना शुरू कर दिया। छात्रों के अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर उनका यह आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बन गया है।
धरने के दौरान मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्री संसद परिसर में चंद्रशेखर आजाद से मिलने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सांसद से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन चंद्रशेखर आजाद अपने रुख पर अडिग रहे और आंदोलन जारी रखने का फैसला दोहराया।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक संगठन या दल की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों मेहनती छात्र-छात्राओं के भविष्य की है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और कथित परीक्षा अनियमितताओं के पीड़ित छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। संसद परिसर में दिया गया उनका यह संदेश शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के अधिकारों की रक्षा की मांग को और अधिक मुखर बना रहा है।

चंद्रशेखर आजाद के इस आंदोलन को विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं का समर्थन भी प्राप्त हुआ है। देर रात तक चले इस धरने ने संसद से लेकर देशभर की राजनीतिक और सामाजिक बहसों को नई दिशा दे दी है।

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