किसानों ने तेज किया संघर्ष, सरकार को भेजा पत्रक
चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को 12वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनरत किसानों ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वे अपनी कृषि भूमि किसी भी कीमत पर अधिग्रहित नहीं होने देंगे। साथ ही आगामी दिनों में आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए बड़ी महापंचायत आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक एवं भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी 'फौजी' ने कहा कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से प्रभावित 58 गांवों के किसान पूरी तरह एकजुट हैं। उनका कहना है कि किसान अपनी जमीन बचाने के लिए हर लोकतांत्रिक संघर्ष करेंगे और "जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे" के संकल्प पर अडिग हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित गांवों में लगातार जनसंपर्क और बैठकों का दौर जारी है, ताकि आंदोलन को और मजबूत बनाया जा सके।
धरना स्थल पर किसानों ने "जब तक विंध्य एक्सप्रेसवे वापस नहीं, तब तक वोट नहीं" के नारे लगाए। आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आगामी चुनाव में प्रभावित क्षेत्र की जनता इसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के नाम वार्ता की मांग को लेकर स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजा गया। किसानों ने सरकार से शीघ्र संवाद स्थापित कर उनकी आपत्तियों और मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। इसके साथ ही धरना स्थल पर विंध्य एक्सप्रेसवे के विरोध के प्रतीक स्वरूप एक पौधे का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
धरने को भारत की जनवादी नौजवान सभा के राज्य सचिव गुलाब चंद ने समर्थन देते हुए किसानों के आंदोलन को न्यायसंगत बताया और कहा कि प्रभावित किसानों की बात सुनी जानी चाहिए।
धरना स्थल पर राम दुलारे कन्नौजिया, विनोद कुमार विश्वकर्मा, कन्हैया मौर्य, गोपाल सिंह, मंगल सिंह, रामनारायण सिंह यादव, गोविंद कुमार, उदयनारायण, उमेश निषाद, वीरेंद्र कुमार यादव, त्रिभुवन तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
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