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धरहरा स्टेडियम विवाद: सपा विधायक ने शिलान्यास पट्ट पर पुराने नामों पर नाराजगी जताई

शिलान्यास पट्ट पर 2024 की तारीख, सपा विधायक भड़के

चंदौली के सकलडीहा सपा विधायक ने धरहरा में निर्माणाधीन जिला स्तरीय स्टेडियम का सोमवार को निरीक्षण कर शिलान्यास पट्ट पर पुराने जनप्रतिनिधियों के नाम लिखे होने पर आपत्ति जताई और वर्तमान सांसद-विधायक का नाम न होने पर नाराजगी व्यक्त की। सकलडीहा से प्रभुनारायण सिंह यादव ने कहा कि स्टेडियम 2025 में स्वीकृत हुआ था, जबकि शिलापट्ट पर 2024 की तारीख लिखी गई है, जिससे जनता को गुमराह किया जा रहा है।

विधायक यादव ने आरोप लगाया कि शिलापट्ट तब लगाया गया जब कार्यदायी संस्था को उनके निरीक्षण की जानकारी मिली। उनका कहना था कि यदि परियोजना वास्तव में 2024 में स्वीकृत थी तो उस समय शिलान्यास और निर्माण कार्य शुरू होना चाहिए था। "अब जब काम शुरू हुआ है, तब शिलापट्ट पर वर्तमान क्षेत्रीय सांसद और विधायक का नाम होना चाहिए," उन्होंने कहा। उन्होंने अधिकारियों पर दबाव में आकर भेदभाव और अपमान करने का आरोप भी लगाया।

धरहरा गाँव में 12 बीघा जमीन पर 23.86 लाख रुपये की लागत से जिला स्तरीय स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। कार्यदायी संस्था ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन शिलापट्ट और अन्य मुद्दों को लेकर विवाद जारी है।

विधायक ने यह भी कहा कि यह परियोजना सपा सरकार के समय स्वीकृत हुई थी, लेकिन तब तक सरकार बदल गई। उन्होंने यह दावे का हवाला दिया कि वर्तमान सरकार को करीब दस वर्ष हो चुके हैं और अब निर्माण कार्य आरंभ हुआ है। साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के आदेश का भी जिक्र किया कि राज्य सरकार द्वारा किए जाने वाले कार्यों पर स्थानीय सांसद और विधायक का नाम अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

दिग्गज नेता ने जिलाधिकारी से मौके पर ही मोबाइल पर बात कर अपनी नाराजगी दर्ज करवाई। उन्होंने अधिकारियों पर दबाव में काम करने और शिलापट्ट पर 2024 की तिथि तथा पूर्व जनप्रतिनिधियों के नाम लगाने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने विधानसभा का अपमान बताया।

विधायक ने निर्माण से जुड़े अन्य विवादों का भी उल्लेख किया, जिसमें किसानों की जमीन और सिंचाई पाइपलाइन के संबंध में बाधाएँ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्टेडियम के लिए अभी करीब एक एकड़ और जमीन आवश्यक है। इसके अलावा, कार्यदायी संस्था ने जल निगम की सिंचाई पाइपलाइन तोड़ दी है और सड़क का अधिग्रहण भी किया जा रहा है।

प्रभुनारायण सिंह यादव ने चेतावनी दी कि यदि नियमानुसार शिलापट्ट पर वर्तमान सांसद और विधायक का नाम नहीं लिखा गया तो यह मुद्दा लोकसभा और विधानसभा में उठाया जाएगा। स्थानीय अधिकारियों और कार्यदायी संस्था की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है।

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