चंद्रशेखर आजाद ने जंतर-मंतर की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसकी तुलना 'जलियांवाला बाग' के काले अध्याय से की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार का दमन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने घोषणा की कि वे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और प्रभावित छात्रों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका लोकतांत्रिक संघर्ष संसद के भीतर और बाहर जारी रहेगा।
यह बयान और आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं। घटना और आरोपों की आधिकारिक जांच या सरकारी प्रतिक्रिया आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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