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आधी रात को धरना स्थल से किसान नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है : पिंटू पाल

बिछिया धरना स्थल से रात 11:30 बजे पुलिस ने कई किसान नेताओं को लिया हिरासत में, मनी देव चतुर्वेदी का धारा 151 में चालान; कार्रवाई के बाद किसानों में आक्रोश

चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण के विरोध में बिछिया धरना स्थल पर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सोमवार की देर रात पुलिस कार्रवाई से माहौल गरमा गया। रात करीब 11:30 बजे धरना दे रहे किसानों और किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान किसान नेता मनी देव चतुर्वेदी सहित कई नेताओं को पुलिस अपने साथ ले गई। बाद में अन्य नेताओं को छोड़ दिया गया, जबकि मनी देव चतुर्वेदी का धारा 151 के तहत चालान किए जाने की बात सामने आई। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही किसान नेताओं में आक्रोश फैल गया।

किसान नेता पिंटू पाल ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे किसानों की आवाज दबाने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि किसान अपने हक और अधिकार के लिए संवैधानिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में आधी रात को धरना स्थल से किसान नेताओं को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।

पिंटू पाल ने कहा कि विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना में क्षेत्र के किसानों की जमीन जा रही है। जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों और किसानों की समस्याओं को लेकर मनी देव चतुर्वेदी सहित अन्य किसान नेता लंबे समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों का उद्देश्य अपनी बात सरकार और जिला प्रशासन तक शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना है। इसके बावजूद आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन किसानों की समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। पिंटू पाल ने कहा कि यदि किसानों की मांगों को लेकर कोई विवाद या प्रशासन को आंदोलन के तरीके पर आपत्ति थी तो अधिकारियों को किसान नेताओं से बातचीत करनी चाहिए थी। आधी रात में धरना स्थल पर पहुंचकर नेताओं को हिरासत में लेना समस्या का समाधान नहीं है।

पिंटू पाल ने कहा कि किसान किसी के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई नहीं लड़ रहा है। वह अपनी जमीन, अपने परिवार और अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है। जिन किसानों की जमीन परियोजना में जा रही है, उनकी समस्याओं को सुनना और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।

किसान नेता ने पुलिस प्रशासन पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में किसानों के आंदोलनों के खिलाफ पुलिस का रवैया लगातार सख्त होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए। किसानों की आवाज को पुलिसिया कार्रवाई से दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

मनी देव चतुर्वेदी के धारा 151 में चालान को लेकर भी किसान नेताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे किसान नेताओं पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए था। किसान नेताओं ने कहा कि गिरफ्तारी और चालान से किसानों की समस्याएं समाप्त नहीं होंगी। इससे आंदोलन और तेज होने की संभावना है।

पिंटू पाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार और जिला प्रशासन की तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम सरकार और जिला प्रशासन की तानाशाही नहीं चलने देंगे। किसान अपने हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रहा है। जरूरत पड़ी तो ईंट से ईंट बजा देंगे।"

उन्होंने कहा कि किसान नेताओं को हिरासत में लेने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। बल्कि इससे किसानों के बीच और आक्रोश पैदा होगा। आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि उन किसानों का है जिनकी जमीन विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना से प्रभावित हो रही है। किसान चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए और उनकी समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान निकाला जाए।

देर रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद धरना स्थल पर मौजूद किसानों और समर्थकों में नाराजगी देखी गई। किसान नेताओं ने कहा कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा के पक्ष में नहीं हैं और अपनी मांगों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाते रहेंगे। हालांकि, उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि किसानों की आवाज दबाने की कोशिश जारी रही तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा।



किसान नेताओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि मनी देव चतुर्वेदी समेत आंदोलन से जुड़े लोगों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाए और किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल वार्ता की जाए। उनका कहना है कि बातचीत के जरिए ही समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

वहीं, किसान नेताओं की चेतावनी के बाद अब विंध्य एक्सप्रेसवे को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। आने वाले दिनों में किसान आंदोलन किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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