स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें युवा- प्राचार्य
चंदौली। सकलडीहा पी.जी. कॉलेज में शनिवार, 15 अगस्त को देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान महाविद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की प्रस्तुति हुई। इस दौरान महाविद्यालय में उपस्थित शिक्षकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और विद्यार्थियों ने राष्ट्रध्वज को सलामी देते हुए देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। विद्यार्थी निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान की सामूहिक प्रस्तुति से पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद किया तथा उनके त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और अपने विचार व्यक्त कर पा रहे हैं, उसके पीछे लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और बलिदान छिपा है।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन है। लंबे संघर्ष के बाद देश को औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई और भारतीयों ने स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने भविष्य का निर्माण शुरू किया। स्वतंत्रता प्राप्ति के उस ऐतिहासिक क्षण ने देशवासियों में नई आशा, नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि विचारों, ज्ञान, जिम्मेदारी और कर्तव्य के प्रति जागरूक होना भी है।
प्राचार्य ने युवा पीढ़ी की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देश के भविष्य का निर्माण आज के विद्यार्थियों के हाथों में है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, ईमानदारी, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रप्रेम के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करे तो भारत को और अधिक मजबूत, समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि महाविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का महत्वपूर्ण संस्थान है। इसलिए यहां अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लक्ष्य के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
प्राचार्य ने महाविद्यालय की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के विकास और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए सभी स्तरों पर प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के विकास में शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी सभी की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के उपप्राचार्य प्रो. दयानिधि सिंह यादव ने उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा प्रेषित पत्र का वाचन किया। उन्होंने पत्र में दिए गए संदेश एवं निर्देशों को उपस्थित शिक्षकगण और विद्यार्थियों के समक्ष रखा। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वतंत्रता हमें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने अध्ययन को प्राथमिकता देते हुए देश और समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के विकास में योगदान देना भी है। उन्होंने संविधान के मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए युवाओं को जागरूक रहने का संदेश दिया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आजादी के बाद भारत ने शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, कृषि, उद्योग और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इस विकास यात्रा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी की है। विद्यार्थियों को देश के सामने मौजूद चुनौतियों को समझते हुए ज्ञान, कौशल और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली। राष्ट्रीय पर्व के प्रति विद्यार्थियों में उत्साह और उमंग दिखाई दी। परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और गरिमा का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम का मंच संचालन यज्ञनाथ पाण्डेय ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाते हुए स्वतंत्रता दिवस के महत्व और राष्ट्रीय पर्व की भावना से उपस्थित लोगों को जोड़े रखा। मंच से देश के स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका से जुड़े विचार भी सामने रखे गए।
समारोह के अंत में उपस्थित शिक्षकगण, कर्मचारी और विद्यार्थियों ने राष्ट्र के प्रति निष्ठा बनाए रखने, संविधान के मूल्यों की रक्षा करने तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का संकल्प लिया। सभी ने देशहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अंत में राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का समापन हुआ। राष्ट्रगान के दौरान पूरा महाविद्यालय परिसर एक बार फिर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने राष्ट्रध्वज को नमन किया। समारोह ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के बलिदान की याद दिलाई, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश भी दिया।