आठ दिन बाद खुली ऑनलाइन सेवाओं की राह, हजारों लंबित आवेदनों के जल्द निस्तारण की उम्मीद
चंदौली। जिले के सकलडीहा सहित सभी तहसीलों में पिछले आठ दिनों से चल रहा लेखपालों का कार्य बहिष्कार बुधवार को समाप्त हो गया। जिलाधिकारी द्वारा लेखपालों के पिछले तीन वर्षों से लंबित ऑनलाइन कार्यों के मानदेय को स्वीकृति दिए जाने के बाद लेखपाल संघ ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया। इसके साथ ही आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन सत्यापन समेत अंश निर्धारण, पेंशन और अन्य राजस्व संबंधी ऑनलाइन कार्य फिर से शुरू हो गए हैं।
लेखपाल संघ ने अपनी मांगों को लेकर चार अगस्त से ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार शुरू किया था। लेखपालों का कहना था कि पिछले तीन वर्षों से विभिन्न ऑनलाइन कार्यों का मानदेय लंबित था। लगातार मांग किए जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने से संघ ने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया था। हड़ताल के दौरान जिले की सभी तहसीलों में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन सहित कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहीं।
ऑनलाइन कार्यों के प्रभावित होने का सीधा असर आम लोगों के साथ-साथ विद्यार्थियों पर भी पड़ा। विभिन्न शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। सत्यापन प्रक्रिया बाधित होने के कारण हजारों आवेदन लंबित हो गए थे। इसके अलावा अंश निर्धारण, पेंशन तथा राजस्व से जुड़े अन्य कार्य भी प्रभावित रहे।
लेखपाल संघ की ओर से बकाया मानदेय के भुगतान की मांग लगातार उठाई जा रही थी। संघ पदाधिकारियों का कहना था कि लेखपालों द्वारा ऑनलाइन सेवाओं से संबंधित कार्य नियमित रूप से किए जाते रहे, लेकिन लंबे समय से इन कार्यों का मानदेय लंबित था। इससे लेखपालों में असंतोष बढ़ रहा था। अंततः संघ ने चार अगस्त से ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार का फैसला लिया।
आठ दिनों तक चले कार्य बहिष्कार के बाद जिलाधिकारी की ओर से लेखपालों की प्रमुख मांग को स्वीकार करते हुए तीन वर्षों से लंबित मानदेय को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके बाद लेखपाल संघ ने कार्य बहिष्कार समाप्त करने की घोषणा की। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही तहसीलों और संबंधित कार्यालयों में ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े कार्यों को दोबारा गति मिलने लगी है।
लेखपाल संघ के जिला अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा लेखपालों की मांग को गंभीरता से लेते हुए बकाया मानदेय स्वीकृत किए जाने के बाद कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि लेखपालों का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं था, बल्कि लंबे समय से लंबित अपनी जायज मांग को शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखना था।
उन्होंने कार्य बहिष्कार के दौरान आम जनता को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए कहा कि अब सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन सत्यापन सहित अन्य लंबित आवेदनों का शीघ्र निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
हड़ताल समाप्त होने से उन विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों को भी राहत मिली है, जिनके प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया ऑनलाइन कार्य बहिष्कार के कारण अटक गई थी। सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रमाण पत्रों की जरूरत वाले लोगों को अब दोबारा आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
प्रशासनिक स्तर पर भी कार्य बहिष्कार समाप्त होने के बाद लंबित आवेदनों के निस्तारण की चुनौती रहेगी। आठ दिनों के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हुए हैं। ऐसे में लेखपालों को प्राथमिकता के आधार पर पुराने मामलों का निस्तारण करना होगा, जिससे सामान्य प्रक्रिया जल्द पटरी पर लौट सके।
लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि कार्य बहिष्कार समाप्त होने के बाद लेखपाल पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कार्यों का निर्वहन करेंगे। लंबित ऑनलाइन सत्यापन और राजस्व संबंधी मामलों को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया जाएगा।
आठ दिनों तक चले कार्य बहिष्कार के समाप्त होने से सकलडीहा समेत जिले की सभी तहसीलों में राजस्व विभाग से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं के सामान्य होने का रास्ता साफ हो गया है। अब आम लोगों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों के सत्यापन तथा अन्य आवश्यक ऑनलाइन सेवाओं के लिए लंबे इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।
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