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मुगलसराय में खुलेआम अवैध शराब बिक्री, पुलिस-आबकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल

निर्धारित समय से पहले और बाद में शराब बिक्री, बिहार भेजी जा रही अधिक मात्रा में शराब; सुविधा शुल्क के आरोप

मुगलसराय,चंदौली। क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि कुछ शराब दुकानों पर निर्धारित समय के नियमों की अनदेखी कर सुबह समय से पहले और शाम को बिक्री का समय समाप्त होने के बाद भी शराब की बिक्री की जा रही है। वहीं बिहार ले जाने वाले लोगों को भी कथित तौर पर निर्धारित मात्रा से अधिक शराब उपलब्ध कराए जाने की चर्चा है। इन आरोपों के बीच पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।


स्थानीय सूत्रों के अनुसार मुगलसराय क्षेत्र में कुछ शराब दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की आवाजाही शुरू हो जाती है और निर्धारित समय से पहले शराब उपलब्ध होने की बात सामने आ रही है। इसी तरह शाम को बिक्री का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी दुकान से शराब मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि यह स्थिति सही है तो यह आबकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला माना जाएगा।

क्षेत्र के कैलाशपुरी सहित कुछ अन्य स्थानों पर स्थित शराब दुकानों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जरूरत के मुताबिक शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है। वहीं रेलवे चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कुछ दुकानों पर भी बिहार जाने वाले लोगों को शराब उपलब्ध कराए जाने की चर्चा है। आरोप है कि ऐसे ग्राहकों को सामान्य निर्धारित मात्रा से अधिक शराब दिए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

सुविधा शुल्क को लेकर चर्चाएं

अवैध शराब कारोबार को लेकर सबसे गंभीर आरोप कथित सुविधा शुल्क को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ दुकानदारों से निर्धारित समय से पहले और बाद में शराब बिक्री के एवज में हर महीने रकम लिए जाने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस के नाम पर करीब 20 हजार रुपये और आबकारी विभाग के नाम पर करीब पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने की बात कही जा रही है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। न ही संबंधित विभाग की ओर से इन दावों की पुष्टि की गई है। ऐसे में इन आरोपों को जांच का विषय माना जाना चाहिए। यदि किसी दुकानदार से अवैध बिक्री के बदले वास्तव में रकम ली जा रही है तो मामला गंभीर होने के साथ ही विभागीय जवाबदेही का भी बनता है।

थाना प्रभारी पर भी लगाए जा रहे आरोप

अवैध शराब कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर मुगलसराय थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ सूत्रों का आरोप है कि शराब कारोबार से जुड़े लोगों को कथित संरक्षण मिल रहा है और क्षेत्र में गैरकानूनी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर रकम और व्यक्ति तय होने की चर्चा है।

हालांकि थाना प्रभारी पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठना स्वाभाविक है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।

आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल

शराब दुकानों के संचालन और निर्धारित समय में बिक्री सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की होती है। ऐसे में यदि किसी दुकान पर नियमित रूप से समय से पहले या बाद में शराब बिक्री हो रही है तो विभागीय निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठता है।

जानकारों का कहना है कि मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित दुकानों के सीसीटीवी फुटेज, स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और ऑनलाइन बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इसके अलावा बिहार की ओर शराब ले जाने वाले संदिग्ध लोगों पर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

जांच से सामने आएगी हकीकत

मुगलसराय क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोप नए नहीं हैं। लेकिन यदि निर्धारित समय के बाहर बिक्री, अधिक मात्रा में शराब उपलब्ध कराने और कथित सुविधा शुल्क जैसे आरोप सामने आ रहे हैं तो पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।

जांच में यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो संबंधित विभाग अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार दुकानदारों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।



फिलहाल क्षेत्र में चर्चा का विषय यही है कि यदि शराब दुकानों पर नियमों की अनदेखी हो रही है तो जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो रही। सवाल यह भी है कि नियमित निरीक्षण और कार्रवाई के बावजूद यदि अवैध बिक्री जारी है तो इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।

अब देखना यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जाता है।