जनजाति शिल्पियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए भारत सरकार प्रयासरत- ओम प्रकाश
ट्राईफेड, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में लगा मेला
वाराणसी,शिवपुर। ट्राईफेड, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी, परिसर के आदिवासी लोक कवि बाबू कन्हैया मरवी सभागार में बुधवार को एक दिवसीय "जनजातीय कलाकार पैनलिस्ट मेले" का आयोजन संयुक्त तत्वावधान में किया गया.
कार्यक्रम का उद्घाटन बिरसा मुंडा जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन मुख्य अतिथि श्री ओम प्रकाश मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी-ट्राइफेड उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश, निजी सचिव–चमन लाल, महावीर सिंह, संस्थान सचिव–बृजभान मरावी एवं अनीश भटनागर ने किया.
उक्त मेले में लगभग 30 जनजाति शिल्पकार जनपद वाराणसी, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, बलरामपुर मिर्जापुर आदि जनपदों से विविध उत्पाद के साथ लोगों ने प्रतिभाग किया.
मेले को संबोधन करते हुए मुख्य अतिथि ओम प्रकाश ने कहा कि जनजाति शिल्पी को धारा जुड़ने के लिए ट्राइफेड, भारत सरकार आदिवासी कलाकारों को उनके कार्यक्षेत्र पर जाकर उनके द्वारा बनी उत्पाद को देश के कोने कोने तक अपने आउटलेट शो रूम के साथ पहुंचा रहा है.
देहरादून ट्राइफेड के निजी सचिव–चमन लाल ने कहा कि आदिवासी कलाकारो को यह सुनहरा अवसर है, जिससे वे अपने उत्पाद के साथ-साथ अपनी पहचान अपने समाज में एवं राज्य में बना सकते हैं.उनके द्वारा बनी उत्पाद को उचित मूल्य का लाभ सीधे दिलाने का काम ट्राइफेड करेगी साथ ही संस्थान कार्य खूब सहारहना किया.
पैनलिस्ट मेले में जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के सचिव बृजभान मरावी ने कहा कि आदिवासी कलाकारों को जोड़ने के लिए संस्थान विगत दस साल से लगातार जनजाति समाज के कलाकारों को दुर्गम, पहाडी एवं गांव आदि क्षेत्र से जोड़कर सहयोग प्रदान कर रहा है। इस कार्यक्रम में ट्राईफेड के साथ लगभग 10 जनजाति शिल्पियों को जोड़ा गया जो भविष्य में ट्राईफेड को अपने उत्पादों की आपूर्ति करेंगे जिससे उनकी आजीविका को सुनिश्चित करने का प्रयास किया जायेगा.
मेले को सफल बनाने में प्रीतम कुमार गोंड, विनोद कुमार, पवन कुमार, रविन्द्र कुमार, उमेश गोंड, जीतेन्द्र कुमार, रंजीत कुमार गोंड, अनिल कुमार गोंड, विनोद कुमार गोंड, बलिराम, मनभावती देवी, संजू गोंड, बेबी शाह, पूजा, मनोज कुमार सहित अन्य उपस्थित रहें।
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