लहलहाने लगी सुखी फसले, माड़ भात का आगम हुआ बरकरार
प्रकृति के आगे विज्ञान आज भी बौना है, बिन बारिश के नदिया नालो में भी पानी के लाले पड़े थे।
चंदौली। जनपद सहित पूर्वांचल भर के किसान जहां धान की रोपाई के लिए पानी बगैर काफी परेशान थे,वही रोपाई की गई धान की फसले सुखने लगी थी, किसान नेताओं ने तो पूर्वांचल के कई जनपदों को सूखा घोषित करने तक की सरकार से मांग करने लगे थे। बुधवार की अल सुबह पछुआ मानसून और उतरहिया हवा ने तो खूब बारिश कराई। आसमान के बादल ने तो घुमड़ घुमड़ कर झमाझम बरसात करके किसानों की सूखती फसल को लहलहा दिया।
समाजसेवी और भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन के युवा जिला अध्यक्ष विजयकांत पासवान (गुड्डू) व वाराणसी मंडल सलाहकार पिंटू पाल ने कहा कि भगवंत की लीला अनन्त अपरम्पार है। बिना बारिश के और उमस भरी भयंकर गर्मी ने तो फसल को सुखाने और अमजनमानस को जीना मोहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। आज की बारिश ने तो मौसम में नई ताजगी भरने और धान,बाजरे,ज्वार ,मक्का, और अरहर की सूखती फसल के लिए अमृत की एक बूंद समान साबित हुईं हैं।
भारतीय किसान टिकैत नेता मणिधार चतुर्वेदी व रंकज सिंह ने कहा कि जाको राखे साइयां मार सको न कोय, प्रकृति के आगे विज्ञान आज भी बौना है। बारिश जब होती है तभी नदिया, नाले भी ऊफान पर होते हैं, बारिश नहीं हुई तो नदिया नालो में भी पानी के लाले पड़े थे।