ओनावल गांव में क्षेत्र पंचायत के काम में हो रहा भारी खेल
मौके पर पांच मजदूर कर रहे कार्य, ऑनलाइन हाजिरी 26 की दर्ज
सरकारी धन का जमकर किया जा रहा बंदर बांट
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली के सकलडीहा ब्लॉक में इन दिनों मनरेगा योजना दुधारू गाय की तरह झड़ी बनी हुई है. ओनावल गांव में क्षेत्र पंचायत के काम में सरकारी धन का जमकर बंदर बांट चल रहा है, मौके पर पांच मजदूर कार्य करते दिखे और ऑनलाइन हाजिरी छब्बीस मजदूर की दर्ज पाई गई है. ग्रामीणों ने बताया कि यह खेल कई दिनों से चल रहा है.
गांव में मनरेगा से काम करने वाले मजदूरों की मानें तो सरकार द्वारा गरीबों के लिये प्रदान की जाने वाली योजनायें सत्ता और शासन-प्रशासन पर बैठे हमसे बड़े गरीब ही इस योजना का लाभ उठा लेते हैं जो उन गरीबों से बचा तो वह हम गरीबों के लिये होता है। जहां पांच मजदूर दस दिन काम करते हैं तो पांच मजदूर की जगह पचीस और दस दिन की जगह पचास दिन की हाजिरी लग जाती है. कभी कभी तो काम किए मजदूरों के खाते में पैसे महीनों नहीं आते हैं और जो कभी काम पर दिखे नहीं उनके खाते में महीने भर की मजदूरी के पैसे आ जाते हैं जो बंदर बांट किया जाता है.
मनरेगा केंद्र सरकार की वह योजना है जो गरीबों को साल में सौ दिन के रोजगार की गारंटी देने की तो छोड़े जो प्रधान पक्ष और पंचायत मित्र(ग्राम रोजगार सेवक) के तालमेल मे है वह उसकी बल्ले बल्ले है और उसके सहारे ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के लिए यह योजना दुधारू गाय के समान है जो, जाड़े, गर्मी बरसात सभी मौसमों में झड़ी बनी हुई है. अगर जनपद से बाहर की गुप्त एजेंसियां मनरेगा की जॉच करें तो ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों में भारी भ्रष्टाचार का खुलासा हो जायेगा.
प्रधान की पक्षपात का शिकार हुये यह तमाम मजदूरों का कहना है कि प्रधान जाब कार्ड और पासबुक अपने ही कब्जे में रखते हैं और हमारे द्वारा किये गये शारीरिक श्रम की मजदूरी में अपना हिस्सा भी लगा लेते हैं। जिससे परिवार की तो छोड़ें अपना पापी पेट भी नहीं पल सकता। शहर में तो कम से कम एक दिन के लिये ही अगर किसी ने खरीद लिया तो ढाई सौ रुपये मिल जायेंगे। वहीं दूसरी ओर मजदूरों का कहना है कि मनरेगा में दी जाने वाली धनराशि महंगाई के हिसाब से बहुत कम है जिससे सालभर हम लोग अपने परिवार को नहीं पाल सकते हैं।