सामाजिक सुधारों और राष्ट्रवाद के लिए काम कर युवाओं को सशक्त किया, दूरदर्शी नेता और आधुनिक भारत के पथप्रदर्शक बन गए
चंदौली। कस्बा स्थित मठ वाली गली के एक हाल में स्वामी विवेकानंद का जन्म दिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान वक्ताओं द्वारा उनके चरित्र का वर्णन करते हुए अनुकरण करने संकल्प दिलाया गया।
इस अवसर पर शिव बच्चन सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय आध्यात्म और संस्कृति को विश्व में स्थापित किया, सामाजिक सुधारों और राष्ट्रवाद के लिए काम किया और युवाओं को सशक्त किया, जिससे वे एक दूरदर्शी नेता और आधुनिक भारत के पथप्रदर्शक बन गए।
स्वामी विवेकानंद एक महान संत, दार्शनिक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने शिकागो धर्म सम्मेलन (1893) में भारतीय दर्शन, वेदांत और योग को विश्व स्तर पर पहुंचाया, रामकृष्ण मठ और मिशन की स्थापना की, और युवाओं को चरित्र निर्माण, राष्ट्रवाद तथा मानवता की सेवा के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने अंधविश्वास और जातिवाद के खिलाफ आवाज़ उठाई और आधुनिक भारत के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक बने, उन्होंने शिकांगो में शून्य पर बोलकर विश्व में भारत देश का डंका बजाया। वह हमेशा कहा करते थे "उठो जागो चलो जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए"।
इस अवसर पर मनीष चंद, श्याम बिहारी लाल श्रीवास्तव, राम नगीना सिंह, रामविलास सिंह, पंकज तिवारी, श्रीनिवास गुप्त, योगेन्द्र प्रताप सिंह, अरविंद श्रीवास्तव सहित सैकड़ों महिलाएं पुरुष मौजूद थे।