Hot Posts

6/recent/ticker-posts

भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव रोकने के लिए UGC लागू करना बेहद जरूरी: अर्जुन प्रसाद आर्य

इसके पूर्ण और तत्काल कार्यान्वयन की मांग हेतु संघर्ष जारी, आगामी 26 को प्रदेश के सभी जिलाधिकारी को दिया जाएगा ज्ञापन 

लखनऊ। अपनी जनता पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के आवाहन पर 26 फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी जनपदों के जिलाधिकारी के माध्यम से पदाधिकारियों द्वारा यूजीसी के समर्थन में महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जायेगा।इस आशय की जानकारी प्रदेश सचिव अर्जुन प्रसाद आर्य ने दी।

श्री आर्य ने बताया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य ने 'यूजीसी कानून 2026' (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026) का पुरजोर समर्थन किया है। उनका तर्क है कि यह कानून एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए आवश्यक है। उन्होंने इसके पूर्ण और तत्काल कार्यान्वयन की मांग की है। 

15 जनवरी 2026 से लागू इस नियम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में धर्म, जाति, लिंग, जन्म-स्थान या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना है। इस नियम के तहत सभी संस्थानों को एक 'समानता कमिटी' गठित करनी अनिवार्य है। इसमें एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया गया है, ताकि वे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।

यह कानून राजनीतिक चर्चाओं और विरोध का विषय बना हुआ है। जहाँ स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेता इसके समर्थन में हैं, वहीं कुछ अन्य वर्गों द्वारा इस पर विरोध भी जताया जा रहा है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस कानून के समर्थन में राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ