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शहीदों के नारे गूंजे फिर से: "आजादी के दीवाने, कुर्बानी के नायक"

शहादत पर देशभर में उफान, शहीदों को याद करते हुए पैदल मार्च निकले

सटीक संवाद, 23 मार्च 2026: भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव की शहादत पर देशभर में उफान रहा। देश के कोने-कोने में शहीदों को याद करते हुए पैदल मार्च निकले। "आजादी के दीवाने। कुर्बानी के नायक" को जिंदाबाद व भ्रष्टाचार और नौकरशाही पर "साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।" के जोरदार नारे लगे। कई शहरों में आयोजित श्रद्धांजलि समारोहों ने शहीदों की ललकार को आज के संघर्ष से जोड़ दिया।

किसान नेता पिंटू पाल का जोरदार संदेश
पिंटू पाल ने बताया कि, "शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने अंग्रेजी हुकूमत को बमकांड और असेंबली कांड से दहला दिया। उनका बलिदान 'आजादी के दीवाने' का प्रतीक है।" उन्होंने चंद्रशेखर आजाद की वीरगाथा सुनाई – हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के इस युवा क्रांतिकारी ने आखिरी गोली खुद पर चलाकर "आजाद मरना" का संदेश दुनिया को दिया। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान, खुदीराम बोस, मंगल पांडे, उधम सिंह जैसे अमर योद्धाओं को भी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में "कुर्बानी के नायक" के रूप में याद किया गया। भाषणों और सभाओं में इनकी कहानियां गूंजीं, प्रेरणा बनीं।

भगत सिंह की भविष्यवाणी साकार: पूंजीवाद का जाल
बाबू शिव बच्चन सिंह ने आरोप लगाया – देश भगत सिंह की चेतावनी वाले पूंजीवादी कुचक्र में फंस गया है। आजादी से पहले अपनी मां को लिखे पत्र में भगत सिंह ने कहा था कि स्वतंत्रता के बाद नई गुलामी न आ जाए।आज वही हो रहा है। देश में अरबपतियों की फौज बढ़ रही है, जबकि आम आदमी त्रस्त।

अर्जुन प्रसाद आर्य की सटीक चेतावनी
श्री आर्य ने भगत सिंह के विचारों को आज के दौर का आईना बताया। कहा "भगत सिंह ने आशंका जताई थी – गोरे अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेज आ जाएंगे। कठपुतली सरकारें चलेंगी, जनता को राहत नहीं मिलेगी।" भ्रष्टाचार-असमानता से जूझते समाज को उन्होंने न्याय, समानता और मानव गरिमा का संदेश दिया। 
अमेरिका-इजरायल गठबंधन पर तीखा प्रहार – "यह युद्ध थोपने की साजिश है। भारत भी प्रभावित। तेल-गैस कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिकी गुलामी की तो देश आर्थिक तबाही में डूब जाएगा।"

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