Hot Posts

6/recent/ticker-posts

केमिकल से पके फल स्वास्थ्य के लिए बड़े घातक

किडनी फेलियर या कैंसर का खतरा, FSSSI ने लगाए बैन,10 लाख जुर्माना और जेल की सजा

नई दिल्ली: खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आम, केला, पपीता जैसे मीठे फलों को जबरन पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ये केमिकल्स फलों को बाहर से चमकदार और पका हुआ दिखाते हैं, लेकिन अंदर से कच्चा रखते हैं। FSSAI की चेतावनी है कि ये सस्ते जहर न केवल पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि किडनी फेलियर और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ाते हैं। बाजार में अवैध रूप से घुसपैठ करने वाले इन रसायनों से हर साल भारत में हजारों स्वास्थ्य मामले दर्ज हो रहे हैं।
जिसके लिए कैल्शियम कार्बाइड मुख्य रूप से जिम्मेदार है, जो फलों के पास रखकर एसीटिलीन गैस छोड़ता है। इस गैस में आर्सेनिक और फॉस्फीन जैसे विषैले तत्व मिले होते हैं। पुराने समय में इसे खदानों में विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब व्यापारी फलों को 2-3 दिनों में 'तैयार' करने के लिए इसका सहारा लेते हैं। FSSAI के अनुसार, ये केमिकल्स फलों की प्राकृतिक पकने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं, जिससे फल का स्वाद और पोषण नष्ट हो जाता है।

तात्कालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य खतरे 
ये केमिकल्स तुरंत उल्टी, दस्त, मुंह में जलन, त्वचा पर झुलसन और निगलने में दर्द पैदा करते हैं। लंबे समय तक सेवन से किडनी क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे फेलियर का जोखिम बढ़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्सेनिक कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है, खासकर लीवर, फेफड़े और त्वचा के कैंसर का। बच्चों और बुजुर्गों पर प्रभाव ज्यादा घातक होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रतिवर्ष 5,000 से अधिक केस ऐसे केमिकल्स से जुड़े पाए जाते हैं।

FSSAI का सख्त कदम और कानूनी कार्रवाई
FSSAI ने सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं कि कैल्शियम कार्बाइड और अन्य सिंथेटिक पकाने वाले रसायनों की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर तत्काल रोक लगाई जाए। उल्लंघन करने वालों पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। प्राकृतिक पकाने की अनुमति केवल इथाइलीन गैस पर है, जो नियंत्रित मात्रा में सुरक्षित मानी जाती है। अधिकारी बाजारों में छापेमारी बढ़ा रहे हैं, और हाल ही में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व बिहार में कई फल व्यापारियों पर कार्रवाई हुई।

फल चुनते समय गंध सूंघें—केमिकल वाला फल तेज रासायनिक गंध देता है।
बाहर चमकदार लेकिन अंदर कठोर फल न लें।जैविक या प्रमाणित फल खरीदें।घर पर फलों को पानी में भिगोकर धोएं और सिरके का छिड़काव करें। FSSAI के इस कदम से फल बाजार में पारदर्शिता आएगी और उपभोक्ता स्वास्थ्य सुरक्षित रहेंगे। विशेषज्ञों का आह्वान है कि प्राकृतिक पकावट को बढ़ावा दें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ