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सकलडीहा पीजी कॉलेज मे विश्व परिवार दिवस पर संगोष्ठी

"परिवार न केवल संस्कार सिखाता है बल्कि समाज की पहली पाठशाला भी है," — प्राचार्य 

"विश्व परिवार दिवस एक सामाजिक संकल्प है, जिसे हमें न केवल मनाना है बल्कि व्यवहार में भी लाना है," — प्रो. दयाशंकर सिंह यादव।

चंदौली के सकलडीहा पीजी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग द्वारा शुक्रवार को विश्व परिवार दिवस के अवसर पर आयोजित विचार संगोष्ठी में परिवार संस्था की प्रासंगिकता, बदलती सामाजिक संरचना और आधुनिक जीवन में पारिवारिक मूल्यों की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में कॉलेज के विद्यार्थी, प्राध्यापक तथा शैक्षणिक अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


प्राचार्य ने दिया परिवार के महत्व पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने कहा कि "परिवार न केवल संस्कार सिखाता है बल्कि समाज की पहली पाठशाला भी है, परिवार भारतीय संस्कृति की आधारशिला है और यही व्यक्ति को संस्कार, अनुशासन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व सिखाता है। उन्होंने पारिवारिक विघटन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए परिवार में संवाद व एकता मजबूत करने का आह्वान किया। प्राचार्य ने स्कूलों व कॉलेजों में पारिवारिक मूल्यों को समावेशी पाठ्यक्रम के माध्यम से फिर से स्थापित करने और जागरूकता कार्यक्रम चलाने का सुझाव दिया।

समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष ने कहा—यह आयोजन केवल औपचारिकता नहीं
मुख्य अतिथि व समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दयाशंकर सिंह यादव ने विश्व परिवार दिवस को परिवार संस्था को पुनः सशक्त करने का सामाजिक संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण, तीव्र आधुनिकीकरण और व्यक्तिवाद के कारण परिवार संबंधों में दूरी आई है, किन्तु भारत में परिवार अभी भी सामाजिक सुरक्षा व सहयोग का केंद्र बना हुआ है। प्रो. यादव ने नीति निर्माताओं तथा शैक्षणिक संस्थानों से पारिवारिक समर्थन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए समेकित कदम उठाने का आग्रह किया।

वक्ताओं ने उठाए अहम मुद्दे
समाजशास्त्र के वरिष्ठ अध्यापकों ने विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। प्रो. समीम राईन ने संयुक्त परिवार प्रणाली के सामाजिक व आर्थिक लाभों तथा साझा संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। प्रो. इंद्रदेव सिंह ने सामाजिक परिवर्तन के प्रभावों और परिवार संरचनाओं में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया। प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह ने पारिवारिक उत्तरदायित्व, घरेलू हिंसा व मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में मजबूत पारिवारिक समर्थन प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. राजेश यादव, डॉ. अजय यादव और डॉ. इंद्रजीत सिंह ने नई पीढ़ी की चुनौतियाँ—डिजिटल प्रभाव, करियर-केंद्रित जीवनशैली और डेटिंग कल्चर—को लेकर संवाद व परामर्श की भूमिका पर चर्चा की। वहीं, डॉ. पवन ओझा, डॉ. मीनू श्रीवास्तव और डॉ. योगेंद्र तिवारी ने पारिवारिक संस्कारों व सामूहिक उत्तरदायित्व के संरक्षण की आवश्यकता का समर्थन किया।

कार्यक्रम संचालन व समापन
संगोष्ठी का संचालन डॉ. जितेंद्र यादव ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम को साहित्यिक शैली में प्रस्तुत कर प्रतिभागियों का ध्यान बनाए रखा। समापन पर डॉ. उदय शंकर झा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उपस्थित सभी को विश्व परिवार दिवस का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प दिलाया।पारिवारिक संवाद व एकता को बढ़ावा देना आवश्यक। मानसिक स्वास्थ्य व काउंसलिंग सेवाओं को पारिवारिक समर्थन का हिस्सा बनाया जाए। शैक्षणिक संस्थानों में पारिवारिक शिक्षा व परामर्श कार्यक्रम बढ़ाने की आवश्यकता है।

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