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सकलडीहा पीजी कॉलेज में 'प्रेमचंद के सपनों का भारत' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 31 जुलाई से

राष्ट्रीय संगोष्ठी में जुटेंगे शिक्षाविद और साहित्यकार, भारतीय समाज और मानवीय मूल्यों पर होगा विमर्श

सटीक संवाद,चंदौली। प्रेमचंद जयंती के अवसर पर सकलडीहा पीजी कॉलेज, सकलडीहा के हिंदी विभाग, पुस्तकालय एवं 'अपनी माटी' संस्थान, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में 31 जुलाई एवं 1 अगस्त 2026 को "प्रेमचंद के सपनों का भारत" विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से शिक्षाविद, साहित्यकार, शोधार्थी और विद्यार्थी सहभागिता करेंगे तथा प्रेमचंद के साहित्य और उनके सामाजिक चिंतन की समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तृत विमर्श होगा।
संगोष्ठी के संरक्षक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी तथा सह-संरक्षक क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, वाराणसी एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ज्ञान प्रकाश वर्मा हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र 31 जुलाई को प्रातः 11 बजे महाविद्यालय परिसर में होगा। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि यूजीसी-एमएमटीटीसी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. आनंद वर्धन शर्मा होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में बीएचयू के हिंदी विभाग के डॉ. अशोक कुमार ज्योति उपस्थित रहेंगे।

उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता महिला महाविद्यालय, बीएचयू के हिंदी विभाग के डॉ. हरीश कुमार तथा वक्ता के रूप में केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, वाराणसी की डॉ. ज्योति सिंह प्रेमचंद के साहित्य में भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखेंगे।

संगोष्ठी का समापन सत्र 1 अगस्त को प्रातः 11 बजे आयोजित होगा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. गया सिंह होंगे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में लालता सिंह राजकीय महिला पीजी कॉलेज, अदलहाट (मिर्जापुर) के पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजकुमार सिंह उपस्थित रहेंगे। मुख्य वक्ता शहीद हीरा सिंह राजकीय महाविद्यालय, धनापुर के हिंदी विभाग के डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह तथा वक्ता के रूप में सकलडीहा पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य श्री यज्ञानाथ पाण्डेय अपने विचार व्यक्त करेंगे।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य प्रेमचंद के साहित्य में निहित भारतीय समाज, ग्रामीण चेतना, सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा और मानवीय मूल्यों के संदेश को वर्तमान समय के संदर्भ में समझना और उस पर गंभीर अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाना है। उन्होंने क्षेत्र के शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने की अपील की।

राष्ट्रीय संयोजक डॉ. जितेंद्र यादव ने कहा कि यह राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रेमचंद के साहित्यिक एवं सामाजिक चिंतन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। कार्यक्रम के सचिव डॉ. श्याम लाल सिंह यादव एवं सह-समन्वयक श्री अजय कुमार यादव ने बताया कि संगोष्ठी की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने सभी आमंत्रित अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों से कार्यक्रम में सहभागिता का अनुरोध किया।

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