प्रेमचंद का साहित्य सामाजिक न्याय का सशक्त दस्तावेज : प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय
चंदौली, 31 जुलाई। सकलडीहा पी.जी. कॉलेज के हिंदी विभाग, पुस्तकालय एवं अपनी माटी संस्थान, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी "प्रेमचंद के सपनों का भारत" का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी के प्रथम दिवस देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों और समकालीन भारत में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। हिंदी विभागाध्यक्ष एवं उप प्राचार्य प्रो. दयानिधि सिंह यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल साहित्यिक धरोहर नहीं, बल्कि भारतीय समाज को दिशा देने वाला जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के विचार आज भी सामाजिक समानता, मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय संस्कृति, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों का सशक्त प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के सपनों का भारत आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था, और नई पीढ़ी को उनके साहित्य से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियाँ भारतीय समाज का वास्तविक स्वरूप प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की आवाज़ को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से पूर्व लिखी गई प्रेमचंद की रचनाएँ सामाजिक कुरीतियों, असमानता और शोषण पर गहरा प्रहार करती हैं। उनके साहित्य में सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय चेतना का स्पष्ट संदेश मिलता है।
मुख्य वक्ता डॉ. हरीश कुमार तथा वक्ता डॉ. ज्योति सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्र निर्माण और समकालीन भारत में उनकी विचारधारा की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद भारतीय जनमानस के अमर साहित्यकार हैं और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन डॉ. जितेंद्र यादव ने किया, जबकि डॉ. प्रमोद कुमार पांडेय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. श्यामलाल सिंह यादव तथा संयोजक श्री अजय कुमार यादव (एसोसिएट प्रोफेसर, पुस्तकालय) ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर एल.बी.एस. महाविद्यालय से प्रो. राजीव कुमार, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. अमितेश सिंह एवं डॉ. संदीप जायसवाल, अग्रसेन महाविद्यालय से डॉ. सुधा यादव एवं मेनका सिंह, जी.डी. बिनानी महाविद्यालय से डॉ. ऋषभ यादव सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधपत्रों का वाचन, अकादमिक विमर्श एवं समापन समारोह का आयोजन किया जाएगा।
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