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दिल्ली कूच से पहले किसान नेताओं को घर में रोका गया

हाउस अरेस्ट से किसानों की आवाज नहीं दबेगी, लोकतंत्र में आवाज उठाना अपराध नहीं अधिकार है- पिंटू पाल

चंदौली। भारत-अमेरिका व्यापार डील तथा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे किसानों को रोकने के लिए मंगलवार सुबह चंदौली में स्थानीय पुलिस ने किसान नेता एवं सकलडीहा सेक्टर नंबर-1 से जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी पिंटू पाल, शेषनाथ यादव, राम अवध यादव समेत कई अन्य किसान नेताओं को उनके घरों पर ही डिटेन (हाउस अरेस्ट) कर दिया। किसान नेताओं ने इसे किसानों की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया।

किसान नेता पिंटू पाल ने जारी बयान में कहा कि उन्हें मंगलवार सुबह ही घर में नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसानों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज उठाने वालों को ही रोक दिया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि यदि किसानों की आवाज उठाने वालों को इस तरह घरों में कैद किया जाएगा, तो किसानों की समस्याएं कौन उठाएगा।

पिंटू पाल ने कहा कि हाउस अरेस्ट कर उनकी आवाज को कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, लेकिन किसानों के अधिकारों की लड़ाई को कभी नहीं रोका जा सकता। उन्होंने विश्वास जताया कि किसान एकजुट होकर अपने हक और सम्मान की लड़ाई पहले की तरह आगे भी मजबूती से लड़ते रहेंगे।
उन्होंने किसानों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।उन्होंने "किसान एकता जिंदाबाद", "किसानों का संघर्ष जिंदाबाद" और "लोकतंत्र जिंदाबाद" के नारों के साथ अपने समर्थकों से संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान किया।

बताया जा रहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार डील और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में किसानों के दिल्ली कूच की संभावना को देखते हुए यह कार्रवाई की गई। किसान संगठनों ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास बताया है।

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