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बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, मायावती बोलीं— पार्टी ने खोया अपना वफादार सिपाही

ब्रेन कैंसर से लंबी जंग के बाद ली अंतिम सांस, मुख्यमंत्री योगी, अखिलेश यादव समेत सभी दलों के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

बलिया/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित हुए उमाशंकर सिंह का बुधवार देर रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह काफी समय से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे और उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन से बसपा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई।

फोटो: उमाशंकर सिंह की फाइल फोटो

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उमाशंकर सिंह बसपा के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले एकमात्र विधायक थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें विधानसभा में बसपा विधायक दल का नेता बनाया था। अपने सरल स्वभाव, जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मुखरता से उठाने और क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहने के कारण उन्होंने जनता के बीच अलग पहचान बनाई।

मायावती बोलीं— पार्टी का कर्मठ और वफादार सिपाही था
बसपा सुप्रीमो मायावती ने उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने उन्हें पार्टी का कर्मठ, ईमानदार और पूरी तरह वफादार सिपाही बताया। मायावती ने कहा कि उनके पुत्र से लगातार संपर्क बना हुआ था और निधन की सूचना भी उन्हें उनके पुत्र ने ही दी। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि "हिम्मत नहीं हारनी है, पूरी बसपा परिवार आपके साथ खड़ा है। कुदरत आपको इस अपार दुख को सहने की शक्ति दे।"

योगी, अखिलेश समेत सभी दलों के नेताओं ने जताया शोक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उमाशंकर सिंह के निधन को दुखद बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी सोशल मीडिया और शोक संदेशों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उमाशंकर सिंह के निधन की सूचना मिलते ही बलिया और पूर्वांचल में उनके समर्थकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों और शुभचिंतकों के पहुंचने की संभावना है। उनके निधन से बसपा ने विधानसभा में अपना एकमात्र प्रतिनिधि भी खो दिया है, जिसे पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक क्षति माना जा रहा है।

संघर्ष, जनसेवा और राजनीति का मजबूत अध्याय
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र स्थित खनवर गांव में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय घुराहू सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त थे। साधारण और अनुशासित परिवार में पले-बढ़े उमाशंकर सिंह ने छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी।

वर्ष 1991 में उन्होंने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज से छात्रसंघ चुनाव जीतकर महामंत्री का पद संभाला। इसके बाद वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होकर उन्होंने स्थानीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वर्ष 2011 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा और 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद 2017 और 2022 में भी लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने क्षेत्र में अपना मजबूत जनाधार कायम रखा।

2022 में बसपा का अकेला चेहरा बने
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और पार्टी का केवल एक उम्मीदवार जीत सका। उमाशंकर सिंह ही विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व करने वाले इकलौते विधायक बने। पार्टी ने उन्हें बसपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया।

जनसेवा से बनाई अलग पहचान
उमाशंकर सिंह केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि जनसेवा के लिए भी व्यापक रूप से पहचाने जाते थे। उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए कई सामाजिक पहल कीं। विशेष रूप से गरीब कन्याओं और जरूरतमंद जोड़ों के लिए आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।

हमेशा याद रहेंगे उमाशंकर सिंह
ब्रेन कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 5 अगस्त 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूर्वांचल की राजनीति ने एक जुझारू, सरल, जनप्रिय और संघर्षशील जननेता को खो दिया। समर्थकों के लिए वह सिर्फ जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले नेता के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे।

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