मैदान से तालाब तक खिलाड़ियों ने दिखाया जोश, प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर किया गया सम्मानित
सकलडीहा। चंदौली जिले के सकलडीहा विकासखंड अंतर्गत लेहरा गांव में नागपंचमी के अवसर पर सोमवार को हनुमान मंदिर के पास पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। गांव की मिट्टी में सजी इस खेल प्रतियोगिता में कबड्डी, कुड़ी और तैराकी जैसे ग्रामीण खेलों में युवाओं और खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खेल मैदान से लेकर तालाब तक प्रतिभागियों में जीत को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। वहीं प्रतियोगिताओं को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
नागपंचमी के पर्व पर आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्र की उन पुरानी खेल परंपराओं की याद ताजा कर दी, जब पर्व-त्योहारों के अवसर पर गांवों में खेल प्रतियोगिताएं लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हुआ करती थीं। बदलते समय में मोबाइल, इंटरनेट और आधुनिक मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस तरह के आयोजन ग्रामीण युवाओं को मैदान से जोड़ने के साथ ही पारंपरिक खेल संस्कृति को जीवित रखने का भी संदेश देते नजर आए।
प्रतियोगिता का आयोजन धर्मराज यादव और अवधेश यादव के नेतृत्व में किया गया, जबकि संयोजक की जिम्मेदारी कमलेश यादव ने संभाली। आयोजकों की देखरेख में कबड्डी, कुड़ी और तैराकी प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया गया। अलग-अलग प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपनी शारीरिक क्षमता, फुर्ती, साहस और खेल कौशल का प्रदर्शन किया।
कबड्डी प्रतियोगिता में रवि यादव, मोनू यादव, जितेंद्र यादव, राहुल मौर्य, सोनू यादव, सूरज यादव, कमलेश यादव, नामवर यादव, रामकृत यादव, राम पूजन मौर्य, त्रिभुवन मौर्य, विजेंद्र यादव पूर्व बीडीसी, आशुतोष यादव, विशाल यादव सहित अन्य खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। कबड्डी के मैदान में खिलाड़ियों के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिला। कोई खिलाड़ी अपनी फुर्ती से विरोधी खेमे में पहुंचकर अंक हासिल करने का प्रयास करता दिखाई दिया तो कोई पकड़ बनाकर प्रतिद्वंद्वी को रोकने की कोशिश करता नजर आया।
खेल के दौरान खिलाड़ियों की रणनीति और तालमेल ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। रेड के दौरान मैदान में रोमांच चरम पर पहुंच जाता था। जैसे ही कोई खिलाड़ी विरोधी टीम के क्षेत्र में प्रवेश करता, दर्शकों की निगाहें उसी पर टिक जातीं। खिलाड़ी को पकड़ने और उसे निर्धारित सीमा से बाहर रोकने के प्रयास में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। हर सफल रेड और शानदार पकड़ पर ग्रामीण तालियां बजाकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहे।
कबड्डी के अलावा कुड़ी प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। ग्रामीण परिवेश से जुड़े इस पारंपरिक खेल में खिलाड़ियों ने अपनी शारीरिक क्षमता और संतुलन का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों में जीत की होड़ के साथ खेल भावना भी दिखाई दी। एक-दूसरे को कड़ी चुनौती देने के बावजूद खिलाड़ियों के बीच आपसी सौहार्द और भाईचारे का माहौल बना रहा।
वहीं आपदा मित्र सुभाष यादव और चंदन यादव की देख रेख में तैराकी प्रतियोगिता ने आयोजन में अलग ही रोमांच भर दिया। तालाब में आयोजित तैराकी प्रतियोगिता को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। पानी में उतरते ही प्रतिभागियों ने अपनी गति और तैराकी कौशल का प्रदर्शन किया। निर्धारित दूरी को सबसे पहले पूरा करने के लिए युवाओं में प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। तैराकी के दौरान किनारे खड़े दर्शक अपने पसंदीदा प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते रहे।
ग्रामीणों के मुताबिक नागपंचमी पर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की परंपरा गांवों में काफी पुरानी रही है। पहले पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि इनके साथ खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक मेल-मिलाप की गतिविधियां भी जुड़ी रहती थीं। कबड्डी, कुश्ती, कुड़ी और तैराकी जैसे खेल गांव के युवाओं के बीच लोकप्रिय हुआ करते थे। ऐसे आयोजनों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी किसी न किसी रूप में शामिल होते थे।
लेहरा गांव में आयोजित इस प्रतियोगिता ने उसी पुरानी ग्रामीण संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। गांव के बुजुर्ग जहां पुराने समय के खेल आयोजनों को याद करते नजर आए, वहीं युवाओं में इन प्रतियोगिताओं को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। प्रतियोगिता के दौरान किसी ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया तो किसी ने फुर्ती और तकनीक के दम पर दर्शकों को प्रभावित किया। तैराकी प्रतियोगिता ने ग्रामीणों के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया।
प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के आधार पर अंगवस्त्र और नगदी पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने के बाद विजेता खिलाड़ियों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। आयोजकों और ग्रामीणों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आयोजक धर्मराज यादव, अवधेश यादव और संयोजक कमलेश यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांव के युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और क्षमता दोनों मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए उचित मंच की आवश्यकता होती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है और उनमें खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों और युवाओं का समय मैदान में कम और मोबाइल स्क्रीन पर अधिक बीत रहा है। ऐसे में गांवों में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन युवाओं को शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने का बेहतर माध्यम बन सकता है। खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, धैर्य और प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित करते हैं।
आयोजकों ने कहा कि नागपंचमी के अवसर पर इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण खेल संस्कृति और आपसी भाईचारे को मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी गांव में खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि स्थानीय युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिल सके।
कार्यक्रम में दर्शकों के रूप में राम अवतार यादव, सारनाथ यादव, राम नारायण, भगत जी, मुन्ना पासवान, सुदर्शन मौर्य, आनंद यादव, धर्मेंद्र यादव, सुभाष यादव, चंदन यादव, सत्यम यादव, नानू यादव, कुलदीप, शुभम, भोला पासवान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने कहा कि नागपंचमी के अवसर पर आयोजित कबड्डी, कुड़ी और तैराकी प्रतियोगिता ने गांव के पुराने दिनों की याद ताजा कर दी। पहले जब मनोरंजन के साधन सीमित थे, तब पर्व-त्योहारों के अवसर पर आयोजित खेल प्रतियोगिताएं ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा हुआ करती थीं। खेल देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचते थे और कई बार देर शाम तक मैदान में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया जाता था।
ग्रामीणों का कहना था कि आज के बदलते दौर में ऐसी परंपराओं को बचाए रखना जरूरी है। इससे नई पीढ़ी को अपनी ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक खेलों से जुड़ने का अवसर मिलता है। साथ ही युवाओं में आपसी मेलजोल और सामाजिक एकता भी मजबूत होती है।
प्रतियोगिता के दौरान पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल रहा। खिलाड़ी जीत के लिए पूरी ताकत झोंकते नजर आए तो दर्शक तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाते रहे। कहीं कबड्डी के मैदान में खिलाड़ियों की फुर्ती चर्चा का विषय बनी तो कहीं तालाब में तैराकों की गति ने लोगों को आकर्षित किया। कुड़ी प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर लोगों की खूब वाहवाही बटोरी।
आयोजकों ने प्रतियोगिता को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी ग्रामीणों, प्रतिभागियों और दर्शकों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग और युवाओं के उत्साह से ही इस तरह के आयोजन सफल हो पाते हैं। भविष्य में भी सामाजिक और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
नागपंचमी के पर्व पर लेहरा गांव में आयोजित कबड्डी, कुड़ी और तैराकी प्रतियोगिता ने जहां युवाओं की खेल प्रतिभा को सामने लाने का काम किया, वहीं ग्रामीण एकता, आपसी भाईचारे और पारंपरिक खेल संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर भी पेश की। पर्व की उमंग के बीच खेल मैदान और तालाब के आसपास देर तक उत्साह का माहौल बना रहा। इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिक दौर में भी यदि ग्रामीण अपनी पुरानी खेल परंपराओं को नए उत्साह के साथ आगे बढ़ाएं तो गांव की प्रतिभाओं को पहचान और बेहतर अवसर दोनों मिल सकते हैं।