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देशभर में हर्षोल्लास और सौहार्द के साथ मनाया गया रक्षाबंधन, विदेशों में भी गूंजा भाई-बहन के प्रेम का संदेश

भारत के साथ नेपाल, मॉरीशस, फिजी, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भारतीय समुदाय ने निभाई राखी की परंपरा, बाजारों में मिठाई, राखी, कपड़े, उपहार और पेट्रोल-डीजल की बढ़ी मांग

नई दिल्ली। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह, विश्वास और आपसी जिम्मेदारी का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार को देशभर में हर्षोल्लास और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया गया। सावन पूर्णिमा के अवसर पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवनभर उनके साथ खड़े रहने का संकल्प लिया। घर-घर में पूजा-अर्चना, तिलक, आरती और मिठाई खिलाने का दौर चला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में पर्व को लेकर उत्साह दिखाई दिया।

रक्षाबंधन का उत्सव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े परिवारों ने दुनिया के अलग-अलग देशों में भी इस पर्व को मनाया। नेपाल, मॉरीशस, फिजी, पाकिस्तान, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, दक्षिण अफ्रीका सहित अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, मलेशिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में रहने वाले भारतीय और हिंदू समुदायों के बीच भी राखी का पर्व मनाया जाता है। हालांकि इन देशों में रक्षाबंधन राष्ट्रीय पर्व नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से भारतीय, हिंदू और दक्षिण एशियाई समुदायों के बीच सांस्कृतिक एवं पारिवारिक उत्सव के रूप में इसकी परंपरा कायम है।

घर-घर सजी राखी की थाली
रक्षाबंधन के दिन सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल रहा। बहनों ने राखी की थाली सजाई। इसमें रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखी गई। भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी गई और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा गया। इसके बाद बहनों ने भाइयों का मुंह मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों को कपड़े, आभूषण, मिठाई, नकद राशि और अन्य उपहार देकर अपना स्नेह व्यक्त किया।

कई परिवारों में दूर रहने वाले भाई-बहनों ने वीडियो कॉल के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़कर पर्व की खुशियां साझा कीं। दूसरे शहरों और राज्यों में रहने वाले भाइयों तक बहनों ने डाक और कूरियर के माध्यम से पहले ही राखियां पहुंचा दी थीं। विदेशों में रहने वाले भाई-बहनों ने भी ऑनलाइन माध्यमों से राखी और उपहार भेजकर इस परंपरा को निभाया।

बाजारों में जमकर हुई खरीदारी
रक्षाबंधन पर्व का असर बाजारों पर भी दिखाई दिया। त्योहार को लेकर कई दिन पहले से ही बाजारों में राखियों और उपहारों की दुकानें सज गई थीं। पर्व के दिन मिठाइयों, राखियों, फलों, कपड़ों, पूजा सामग्री, सौंदर्य प्रसाधन, आभूषण, खिलौनों और विभिन्न उपहारों की जमकर खरीदारी हुई। रंग-बिरंगी और आकर्षक डिजाइन वाली राखियों ने बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित किया।

मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ रही। पारंपरिक मिठाइयों के साथ पैक्ड गिफ्ट बॉक्स की भी मांग रही। बहनों ने भाइयों के लिए पसंद के अनुसार उपहार खरीदे, जबकि भाइयों ने भी बहनों को उनकी पसंद के सामान भेंट किए। त्योहार के कारण स्थानीय कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक दिखाई दी।

पेट्रोल-डीजल की भी बढ़ी मांग
रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में लोगों के अपने घरों और रिश्तेदारों के यहां आने-जाने के कारण वाहनों की आवाजाही भी बढ़ी। इसके चलते पेट्रोल और डीजल की मांग में भी सामान्य दिनों की तुलना में तेजी देखने को मिली। निजी कारों, मोटरसाइकिलों, बसों और अन्य यात्री वाहनों से सफर करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने के कारण पेट्रोल पंपों पर भी दिनभर आवाजाही बनी रही।

त्योहार पर लोगों की बढ़ी आवाजाही का असर परिवहन और बाजार से जुड़े दूसरे कारोबारों पर भी दिखाई दिया। दूर-दराज से आने वाले लोग खरीदारी के साथ रिश्तेदारों और परिचितों के घर पहुंचकर पर्व की खुशियां साझा करते नजर आए।

नेपाल में जनै पूर्णिमा का भी विशेष महत्व

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में रक्षाबंधन का विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। वहां सावन पूर्णिमा के अवसर पर कई समुदायों में इसे जनै पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा भी निभाई जाती है। भाई-बहन के बीच राखी बांधने की परंपरा के कारण भारत और नेपाल के बीच इस पर्व का विशेष भावनात्मक जुड़ाव है।

मॉरीशस और फिजी में भी भारतीय परंपरा कायम
भारतीय मूल की बड़ी आबादी वाले मॉरीशस और फिजी में भी रक्षाबंधन की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। यहां भारतीय समुदाय अपने घरों के अलावा मंदिरों, विद्यालयों और सामुदायिक संस्थानों में भी पर्व मनाता है। भारतीय मूल के परिवार अपनी अगली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए ऐसे त्योहारों को विशेष महत्व देते हैं।

अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में भी राखी की रौनक

अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाले भारतीय परिवारों के बीच भी रक्षाबंधन का उत्साह दिखाई देता है। कई स्थानों पर भारतीय समुदाय के संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से राखी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भाई-बहन पारंपरिक परिधान पहनकर एक-दूसरे को राखी बांधते हैं और पर्व की खुशियां साझा करते हैं।
दूर रहने वाले भाई-बहनों के लिए डिजिटल माध्यम इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के जरिए परिवार के सदस्य एक-दूसरे से जुड़े और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

ऑस्ट्रेलिया, यूएई और अन्य देशों में भी मनाया गया पर्व

ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में भारतीय मूल के लोगों ने रक्षाबंधन मनाया। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय परिवारों ने अपने घरों और सामुदायिक स्तर पर राखी का आयोजन किया। भारतीय समुदायों ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखते हुए भाई-बहन के रिश्ते की अहमियत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।

पाकिस्तान और अन्य देशों में भी समुदायों ने निभाई परंपरा

पाकिस्तान समेत कुछ अन्य देशों में भी हिंदू और भारतीय समुदाय रक्षाबंधन मनाते हैं। हालांकि वहां यह राष्ट्रीय पर्व नहीं है, लेकिन संबंधित समुदायों के बीच इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा कायम है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे भारतीय मूल के लोग अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस पर्व को मनाते हैं।

प्रेम, विश्वास और भाईचारे का संदेश

रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने वाला पर्व है। बदलते समय के साथ इसके स्वरूप में बदलाव जरूर आया है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की मूल भावना आज भी कायम है।

विदेशों में बसे भारतीयों के लिए रक्षाबंधन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है। हजारों किलोमीटर की दूरी के बावजूद राखी का छोटा-सा धागा परिवार के सदस्यों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। आधुनिक तकनीक ने भी इस दूरी को काफी हद तक कम कर दिया है।

कुल मिलाकर रक्षाबंधन का पर्व देशभर में प्रेम, उमंग और सौहार्द के वातावरण में मनाया गया। घरों में भाई-बहन के स्नेह की खुशियां बिखरीं तो बाजारों में राखी, मिठाई, कपड़े और उपहारों की खरीदारी से रौनक रही। लोगों की बढ़ी आवाजाही के कारण पेट्रोल-डीजल समेत विभिन्न वस्तुओं की मांग भी बढ़ी। वहीं भारत से बाहर नेपाल, मॉरीशस, फिजी, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, खाड़ी देशों और दुनिया के अन्य हिस्सों में बसे भारतीय समुदायों ने भी राखी बांधकर अपनी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखा।

रक्षाबंधन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि प्रेम और रिश्तों की कोई सीमा नहीं होती। देश और महाद्वीप बदल सकते हैं, लेकिन भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और अपनापन का रक्षा सूत्र दुनिया के किसी भी कोने में बांधा जा सकता है।