चंदौली। कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को आयोजित किसान दिवस की बैठक में किसानों ने खाद, बिजली, सिंचाई और प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखते हुए उनके शीघ्र और प्रभावी समाधान की मांग की। इस दौरान जहां किसान खेती-किसानी से जुड़ी परेशानियां अधिकारियों के सामने रख रहे थे, वहीं बैठक में मौजूद जल निगम के अवर अभियंता (एई) मोहित पांडेय मोबाइल फोन पर गेम खेलते नजर आए। अधिकारी के बैठक के दौरान मोबाइल में व्यस्त दिखाई देने का मामला चर्चा का विषय बन गया। किसानों ने इसे बैठक की गंभीरता और किसानों की समस्याओं के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता के विपरीत बताया।
किसान दिवस की बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखना और संबंधित विभागों के अधिकारियों के माध्यम से उनका समाधान सुनिश्चित कराना था। बैठक में किसानों ने बताया कि इस समय खेती कई स्तर की समस्याओं से जूझ रही है। खाद की उपलब्धता, बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, नहरों में पर्याप्त पानी और सिंचाई की व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। किसानों का कहना था कि कृषि कार्य समयबद्ध होता है। यदि खेती के जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं तो इसका सीधा असर फसल की पैदावार और किसान की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
समस्याओं के बीच मोबाइल गेम में व्यस्त दिखे अधिकारी
बैठक में किसानों की समस्याओं पर चर्चा चल रही थी। जिलाधिकारी किसानों की बातें सुन रहे थे और संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में समस्याओं के समाधान को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान जल निगम के अवर अभियंता मोहित पांडेय मोबाइल फोन पर गेम खेलते नजर आए। उनकी तस्वीर सामने आने के बाद यह मामला किसानों और बैठक से जुड़े लोगों के बीच चर्चा में आ गया।
किसानों का कहना है कि किसान दिवस उनके लिए अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच है। किसान अपनी खेती से जुड़ी परेशानियां लेकर उम्मीद के साथ अधिकारियों के सामने पहुंचते हैं। ऐसे में बैठक के दौरान किसी अधिकारी का मोबाइल गेम में व्यस्त दिखाई देना गंभीरता के अभाव का संकेत माना जा सकता है। किसानों ने कहा कि अधिकारियों से अपेक्षा रहती है कि वे बैठक में उठने वाले प्रत्येक मुद्दे को ध्यान से सुनें और संबंधित समस्याओं के समाधान में अपनी भूमिका निभाएं।
हालांकि, मोबाइल फोन पर गेम खेलने को लेकर संबंधित अवर अभियंता की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए मामले में उनका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। यह स्पष्ट नहीं है कि अधिकारी किस अवधि तक मोबाइल पर व्यस्त थे। इसके बावजूद किसान दिवस जैसी बैठक के दौरान अधिकारी के गेम खेलते नजर आने की तस्वीर ने प्रशासनिक बैठकों में अधिकारियों की गंभीरता और जवाबदेही को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए चार गुना मुआवजे की मांग
बैठक में प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। किसान नेता रतन सिंह ने परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों के हितों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण की स्थिति में बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग की।
रतन सिंह ने कहा कि किसानों की जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। जमीन जाने के बाद किसान और उसके परिवार के सामने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का सवाल खड़ा हो सकता है। इसलिए किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की सहमति, हितों और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।
उन्होंने विकास भवन के पास आंदोलन कर रहे किसानों से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि आंदोलन के दौरान किसानों के लिए पानी का टैंकर बीच रास्ते में रोक दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं तो उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित क्यों किया जाना चाहिए। किसान नेता ने कहा कि किसानों को भी अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों की जमीन ली जाती है तो उन्हें उचित और सम्मानजनक मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों के हितों की अनदेखी कर भूमि अधिग्रहण किए जाने की स्थिति में विरोध जारी रखने की बात भी कही गई।
समितियों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग
किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने सहकारी समितियों पर खाद की उपलब्धता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित हो सकती है। किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े, इसके लिए सभी सरकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की गई।
किसानों ने कहा कि समितियों पर खाद की उपलब्धता की नियमित निगरानी जरूरी है। यदि किसी समिति पर खाद खत्म हो जाती है तो किसानों को दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता है। किसानों ने प्रशासन से वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और मांग के अनुरूप पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने की मांग की।
बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से बढ़ी परेशानी
किसान दिवस में बिजली आपूर्ति और लो-वोल्टेज की समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही। किसानों ने बताया कि कई क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लो-वोल्टेज के कारण नलकूप और अन्य विद्युत चालित सिंचाई उपकरण ठीक से संचालित नहीं हो पाते हैं। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है।
किसानों का कहना था कि कम बारिश की स्थिति में सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भरता और बढ़ जाती है। ऐसे में यदि बिजली कटौती के साथ लो-वोल्टेज की समस्या बनी रही तो फसलों को समय पर पानी देना मुश्किल होगा। किसानों ने कृषि सीजन में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और लो-वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की।
नहरों में रोस्टर के अनुसार पानी छोड़ने की मांग
कम बारिश को देखते हुए किसानों ने नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। किसानों का कहना था कि नहरों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार पानी छोड़ा जाए, ताकि किसान अपनी सिंचाई की योजना पहले से बना सकें। समय पर पानी नहीं मिलने से धान सहित अन्य फसलों को नुकसान की आशंका रहती है।
किसानों ने नहरों की नियमित निगरानी, सफाई और रोस्टर के अनुसार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की। उनका कहना था कि बिजली और नहर दोनों व्यवस्थाओं को बेहतर बनाकर ही मौजूदा कृषि परिस्थितियों में किसानों को राहत दी जा सकती है।
समस्याओं के समाधान की मांग
बैठक में किसानों की ओर से उठाए गए विभिन्न मुद्दों को अधिकारियों ने सुना और संबंधित समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि, किसानों ने कहा कि बैठकों में समस्याएं उठाने के बाद आश्वासन तो मिलता है, लेकिन कई मामलों में धरातल पर कार्रवाई होने में काफी समय लग जाता है। उन्होंने मांग की कि किसान दिवस में उठाई गई प्रत्येक समस्या को विभागवार दर्ज कर संबंधित अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए और उसके समाधान की नियमित समीक्षा की जाए।
किसानों ने कहा कि किसान दिवस केवल औपचारिक बैठक न रह जाए, बल्कि यहां उठने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान भी दिखाई देना चाहिए। खाद की उपलब्धता, बिजली आपूर्ति, लो-वोल्टेज और नहरों में पानी जैसे मुद्दे सीधे किसानों की फसल से जुड़े हैं। इसलिए इन मामलों में तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।
बैठक में किसान नेता मणिदेव चतुर्वेदी, रतन सिंह, दीनानाथ श्रीवास्तव, सतीश चौहान, शेषनाथ यादव, गोपाल सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि कृषि से जुड़े मूलभूत संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना में प्रभावित किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए।
कुल मिलाकर किसान दिवस की बैठक में जहां किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को प्रशासन के सामने रखने का मंच मिला, वहीं बैठक के दौरान अवर अभियंता के मोबाइल गेम में व्यस्त नजर आने की तस्वीर ने अधिकारियों की कार्यशैली और बैठकों में उनकी गंभीरता को लेकर अलग चर्चा छेड़ दी। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन और संबंधित विभाग किस स्तर तक प्रभावी कार्रवाई करते हैं।