चंदौली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से तीन बैंक पासबुक, तीन कूटरचित/एडिटेड आधार कार्ड और एक वीवो कंपनी का स्मार्टफोन बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपित विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर अथवा अपने नाम से अलग-अलग बैंक खाते संचालित कराते थे और उन खातों से संबंधित एटीएम कार्ड, सिम कार्ड तथा नेट बैंकिंग की जानकारी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाते थे। इन बैंक खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार साइबर सेल, चंदौली की जांच में बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते की संदिग्ध गतिविधियां सामने आई थीं। यह खाता पवन कुमार पुत्र सीताराम के नाम पर संचालित था। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल यानी एनसीआरपी पर उपलब्ध शिकायतों और बैंक संबंधी अभिलेखों की जांच में पता चला कि उक्त खाते का इस्तेमाल विभिन्न राज्यों में दर्ज ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की और संदिग्धों की तलाश में अभियान चलाया।
पुलिस के मुताबिक इस बैंक खाते से दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र में दर्ज साइबर अपराध की शिकायतें जुड़ी मिलीं। दिल्ली के नॉर्थ वेस्ट साइबर पुलिस स्टेशन से संबंधित एक शिकायत, गुजरात के अहमदाबाद सिटी स्थित नारणपुरा थाने से संबंधित शिकायत और महाराष्ट्र के वर्धा जिले के सेलू थाने से संबंधित शिकायत में इस खाते का इस्तेमाल सामने आया। पुलिस जांच में खाते में कई अलग-अलग धनराशियों के ट्रांसफर होने की जानकारी भी सामने आई।
खाते में साइबर ठगी की धनराशि पहुंचने के संबंध में खाताधारक से पूछताछ की गई, लेकिन पुलिस के अनुसार वह कोई संतोषजनक और विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दे सका। साइबर सेल की जांच रिपोर्ट और लिखित सूचना के आधार पर थाना चंदौली में मुकदमा अपराध संख्या 0409/2026 दर्ज किया गया। शुरुआत में मुकदमा धारा 318(4) बीएनएस और धारा 66D आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। विवेचना आगे बढ़ने पर मामले में धारा 319(2), 336(3), 338, 339 और 3(5) बीएनएस की भी बढ़ोतरी की गई।
पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक चंदौली बिन्देश्वरी प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस और साइबर टीम ने साइबर अपराध तथा म्यूल खातों से जुड़े संदिग्धों की तलाश शुरू की। इसी क्रम में 10 अगस्त 2026 को रात करीब 00:17 बजे पुलिस टीम ने मझवार रेलवे स्टेशन के पास से तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपितों में पहला नाम पवन कुमार पुत्र सीताराम निवासी ग्राम व पोस्ट टुन्नू/धुन्नू, थाना शहाबगंज, जनपद चंदौली का है। उसकी उम्र करीब 21 वर्ष बताई गई है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक आधार कार्ड और बैंक ऑफ इंडिया की एक पासबुक बरामद की। पासबुक पर खाता संख्या 690810110008947 और खाताधारक के रूप में पवन कुमार पुत्र सीताराम का नाम दर्ज था।
पुलिस ने उक्त खाते का विवरण एनसीआरपी पोर्टल पर जांचा तो उससे संबंधित तीन ऑनलाइन साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज मिलीं। जांच में अलग-अलग लेनदेन में 5,860 रुपये, 2,000 रुपये, 2,580 रुपये, 1,290 रुपये, 2,000 रुपये, 1,250 रुपये, 5,150 रुपये, 1,250 रुपये और 1,050 रुपये की धनराशि ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई।
पवन के कब्जे से बरामद आधार कार्ड की जांच में पुलिस को गंभीर अनियमितता मिली। कार्ड पर नाम राकेश कुमार, जन्मतिथि 02 अगस्त 2002 और पता ग्राम व पोस्ट आलमपुर, उत्तर प्रदेश-232108 दर्ज था, जबकि उस पर फोटो पवन कुमार की लगी हुई थी। पुलिस ने इसे कूटरचित/एडिटेड आधार कार्ड बताया है। जांच एजेंसी के अनुसार फर्जी पहचान का इस्तेमाल वास्तविक पहचान छिपाने के उद्देश्य से किया जा रहा था।
दूसरे गिरफ्तार आरोपित की पहचान राजेश उर्फ पखण्डू पुत्र स्वर्गीय राम अवध, निवासी बढ़वल खास, थाना सकलडीहा, जनपद चंदौली के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक आधार कार्ड और केनरा बैंक की पासबुक बरामद की। पासबुक पर खाता संख्या 110174369282 और खाताधारक का नाम पवन कुमार दर्ज था।
पुलिस के अनुसार इस खाते की एनसीआरपी पोर्टल पर जांच करने पर इससे संबंधित छह ऑनलाइन साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज मिलीं। अलग-अलग शिकायतों में 12,300 रुपये, 5,000 रुपये, 5,200 रुपये, 100 रुपये, 13,000 रुपये, 6,600 रुपये, 18,500 रुपये और 5,855 रुपये की धनराशि खाते में ट्रांसफर होने की जानकारी मिली।
राजेश के पास से बरामद आधार कार्ड पर दिनेश कुमार का नाम, जन्मतिथि 06 अगस्त 1992 और चोलापुर, वाराणसी का पता दर्ज था। पुलिस के मुताबिक कार्ड पर फोटो किसी अन्य व्यक्ति की थी और दस्तावेज में दर्ज पहचान गिरफ्तार आरोपित से मेल नहीं खाती थी। पुलिस ने इसे भी कूटरचित आधार कार्ड बताया है।
तीसरे गिरफ्तार आरोपित की पहचान राहुल कुमार पुत्र मराछु निवासी बढ़वल खास, थाना सकलडीहा, जनपद चंदौली के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 35 वर्ष बताई गई है। उसके कब्जे से एक आधार कार्ड और उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की पासबुक बरामद की गई। पासबुक पर खाता संख्या 84340100005123, आईएफएससी कोड BARB0BUPGBX और खाताधारक का नाम गोविन्द दर्ज था।
एनसीआरपी पोर्टल पर जांच के दौरान इस खाते से संबंधित चार ऑनलाइन साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज पाई गईं। पुलिस के मुताबिक अलग-अलग शिकायतों में इस खाते में 8,000 रुपये, 6,500 रुपये, 8,000 रुपये और 8,000 रुपये ट्रांसफर होने की जानकारी मिली। इसके अलावा अन्य शिकायतों में भी उक्त खाता संख्या ट्रांजैक्शन चेन में दर्ज पाई गई।
राहुल के पास से मिले आधार कार्ड पर रमेश कुमार का नाम, जन्मतिथि 05 जून 1994 और वाराणसी के लखमीपुर का पता दर्ज था। पुलिस के अनुसार आधार कार्ड पर राहुल कुमार की फोटो लगी हुई थी, जबकि नाम रमेश कुमार अंकित था। पुलिस ने इसे भी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए तैयार किया गया कूटरचित दस्तावेज बताया है।
पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों ने बताया कि उन्होंने फर्जी आधार इसलिए बनवाए थे, ताकि पकड़े जाने की स्थिति में उनकी वास्तविक पहचान सामने न आ सके। आरोपितों ने पुलिस को यह भी बताया कि वे क्षेत्र में घूम-घूमकर लोगों को बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार करते थे। इसके अलावा अपने नाम से भी अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपित बैंक खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और नेट बैंकिंग आईडी-पासवर्ड एकत्र करते थे। पूछताछ में उन्होंने यह जानकारी दी कि इन बैंकिंग संसाधनों को सलीम चिश्ती नामक व्यक्ति तक पहुंचाया जाता था। पुलिस के अनुसार उक्त व्यक्ति बार-बार अपना मोबाइल नंबर बदलता था और आरोपितों ने उसका स्थायी पता नहीं जानने की बात कही है।
आरोपितों के अनुसार वे आपस में व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क करते थे और बैंक खातों से संबंधित एटीएम कार्ड, सिम कार्ड तथा अन्य सामग्री प्रयागराज जाकर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाते थे। पुलिस अब पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
जांच में सामने आए तथ्यों से पुलिस को आशंका है कि बैंक खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे दूसरे खातों में स्थानांतरित करने की गतिविधियां संचालित की जाती हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए कुल कितनी धनराशि का लेनदेन हुआ और इससे जुड़े अन्य खाताधारकों अथवा सहयोगियों की भूमिका क्या रही।
पुलिस ने बताया कि साइबर फ्रॉड में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेनदेन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक बिन्देश्वरी प्रसाद पाण्डेय, निरीक्षक रामजीत यादव, साइबर सेल के उपनिरीक्षक अभिषेक शुक्ला, उपनिरीक्षक मोहम्मद असलम शाह, रिजर्व कांस्टेबल आशुतोष तथा चालक कांस्टेबल सत्यप्रकाश मौर्य शामिल रहे। पुलिस टीम की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की विधिक प्रक्रिया जारी है।
चंदौली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध से जुड़े अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी रहेगा। पुलिस द्वारा लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, यूपीआई पिन या नेट बैंकिंग संबंधी जानकारी उपलब्ध न कराएं। बैंक खाता किराये पर देना या किसी दूसरे व्यक्ति को उसके संचालन के लिए उपलब्ध कराना भी गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल संबंधित बैंक और साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जाती है।
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