चंदौली। अपराधियों को सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत चंदौली पुलिस की प्रभावी पैरवी, वैज्ञानिक विवेचना और साक्ष्यों के संकलन के परिणाम सामने आने लगे हैं। मंगलवार को जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज पांच पुराने आपराधिक मामलों में न्यायालयों ने अभियुक्तों को दोष सिद्ध करते हुए सजा और अर्थदंड से दंडित किया। इनमें सड़क दुर्घटना, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धाराओं से जुड़े मामले शामिल हैं।
पुलिस कार्यालय की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन अधिकारियों और संबंधित थानों की पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई। इसके फलस्वरूप न्यायालयों ने अलग-अलग मामलों में अभियुक्तों को न्यायालय उठने तक की अवधि से लेकर 43 दिन के कठोर कारावास तक की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक मामले में अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अभियुक्तों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सड़क दुर्घटना के 2006 के मामले में अभियुक्त को सजा
थाना सैयदराजा में वर्ष 2006 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 11/2006 धारा 279, 337, 338, 427 और 304ए भादवि से संबंधित मामले में अभियुक्त नन्दू सिंह पुत्र बोधन सिंह, निवासी मेठूपुर, थाना नदपुरी, जिला रोहतास, बिहार को न्यायालय ने दोष सिद्ध करते हुए न्यायालय उठने तक की अवधि की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 1000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
पुलिस के अनुसार अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में अभियोजन की ओर से विजय कुमार पाण्डेय, एपीओ ने पैरवी की, जबकि कांस्टेबल राजीव प्रजापति पैरोकार रहे। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभाष त्रिपाठी की अदालत में हुई।
एनडीपीएस एक्ट के मामले में 43 दिन का कठोर कारावास
थाना धीना में वर्ष 2020 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 18/2020 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामले में अभियुक्त श्याम सुन्दर उपाध्याय पुत्र स्वर्गीय हरिहर उपाध्याय, निवासी ग्राम भैसऊर, थाना धीना, जनपद चंदौली को न्यायालय ने दोष सिद्ध करते हुए 43 दिन के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही न्यायालय ने अभियुक्त पर 5000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में अभियोजन की ओर से संजय कुमार त्रिपाठी, एडीजीसी ने पैरवी की, जबकि कांस्टेबल मनीष कुमार गुप्ता पैरोकार रहे। मामले की सुनवाई एएसजे कक्ष संख्या प्रथम के न्यायाधीश अशोक कुमार XI की अदालत में हुई।
सड़क दुर्घटना के दूसरे मामले में भी दोष सिद्ध
थाना सैयदराजा में वर्ष 2006 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 67/2006 धारा 279, 337 और 338 भादवि के मामले में अभियुक्त गनेश प्रसाद पुत्र बध्दन साव, निवासी रसोईया धमना, थाना बरछी, जिला हजारीबाग, झारखंड को न्यायालय ने दोष सिद्ध कर दिया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभाष त्रिपाठी की अदालत ने अभियुक्त को न्यायालय उठने तक की अवधि की सजा सुनाते हुए 1200 रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस मामले में अभियोजन अधिकारी विजय कुमार पाण्डेय, एपीओ और थाना सैयदराजा पुलिस की प्रभावी पैरवी को पुलिस ने सराहनीय बताया है।
आर्म्स एक्ट में अभियुक्त को भी मिली सजा
थाना मुगलसराय में वर्ष 2008 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 430/2008 धारा 4/25 आर्म्स एक्ट के मामले में अभियुक्त शमीम उर्फ सोनी पुत्र अब्दुल अजीज, निवासी दुल्हीपुर, थाना मुगलसराय, जनपद चंदौली को न्यायालय ने दोष सिद्ध करते हुए न्यायालय उठने तक की अवधि की सजा सुनाई।
अदालत ने अभियुक्त पर 1000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभाष त्रिपाठी की अदालत में हुई। अभियोजन अधिकारी विजय कुमार पाण्डेय, एपीओ तथा थाना मुगलसराय पुलिस की प्रभावी पैरवी को अभियुक्त को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण बताया गया।
झूठी सूचना देने के मामले में महिला दोषी करार
थाना मुगलसराय में वर्ष 2005 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या सी-19/2005 धारा 182 भादवि के मामले में अभियुक्त श्रीमती मुन्नी देवी पत्नी राम अवध प्रसाद गोंड, निवासी कुढ़ कला, थाना मुगलसराय, जनपद चंदौली को भी न्यायालय ने दोष सिद्ध किया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रभाष त्रिपाठी की अदालत ने अभियुक्ता को न्यायालय उठने तक की अवधि की सजा सुनाने के साथ 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पुराने मामलों में सजा से पुलिस की पैरवी को मिली मजबूती
एक ही दिन में पांच मामलों में अभियुक्तों के दोष सिद्ध होने और सजा सुनाए जाने को चंदौली पुलिस अपने ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान की प्रभावी पैरवी का परिणाम बता रही है।
इन मामलों में कई मुकदमे 2005, 2006 और 2008 के हैं, जबकि एक मामला 2020 का है। लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन मामलों में पुलिस और अभियोजन की ओर से साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए जाने के बाद अदालतों ने अपना फैसला सुनाया।
पुलिस का कहना है कि ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत गंभीर और पुराने मुकदमों में प्रभावी पैरवी, वैज्ञानिक विवेचना तथा उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित संकलन कर अभियुक्तों को न्यायालय से सजा दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन अधिकारी और संबंधित थानों के पैरोकारों के बीच समन्वय स्थापित कर मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक मंगलवार को हुई इन पांच सजाओं में सड़क दुर्घटना से लेकर मादक पदार्थ और अवैध हथियार से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि न्यायालय से दोषियों को सजा मिलने से पीड़ितों को न्याय मिलने के साथ ही अपराधियों में कानून का भय भी कायम होगा। चंदौली पुलिस ने अभियुक्तों को सजा दिलाने में मॉनिटरिंग सेल, संबंधित अभियोजन अधिकारियों और थाना सैयदराजा, धीना तथा मुगलसराय पुलिस की प्रभावी पैरवी को सराहनीय बताया है।
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