अश्लील वीडियो से करते थे ब्लैकमेलिंग; मोबाइल, नकदी समेत फर्जी दस्तावेज बरामद
नौकरी-मकान का झांसा देकर महिलाओं को बनाते थे बंधक
वीडियो वायरल करने की धमकी देकर वसूलते थे रकम
चंदौली। महिलाओं को नौकरी और मकान दिलाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने, उन्हें बंधक बनाकर अश्लील फोटो-वीडियो बनाने और फिर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेलिंग एवं धन उगाही करने वाले कथित गिरोह का चंदौली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना मुगलसराय पुलिस, साइबर सेल और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत तीन पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार महिला खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़िताओं को डराती-धमकाती थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से आठ एंड्रॉइड मोबाइल फोन, 72,300 रुपये नकद, नौ एटीएम कार्ड, फर्जी एवं कूटरचित पहचान पत्र, विभिन्न बैंकों की पासबुक-चेकबुक, पोर्टेबल वाईफाई डिवाइस, एक टॉर्चर किट और दो वाहन बरामद किए हैं।
डायल 112 और एनसीआरपी पोर्टल से मिली शिकायतों ने खोला राज
पुलिस के मुताबिक, चंदौली क्षेत्र में डायल 112 और एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से अलग-अलग शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों में बताया गया था कि एक संगठित गिरोह महिलाओं को नौकरी और मकान दिलाने के नाम पर बुलाकर बंधक बना रहा है। इसके बाद खुद को पुलिस टीम बताकर महिलाओं को डराया-धमकाया जाता और उनके अश्लील फोटो एवं वीडियो बनाए जाते थे।
पुलिस के अनुसार, वीडियो वायरल करने की धमकी देकर महिलाओं और उनके परिजनों से रकम की मांग की जाती थी। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए थाना मुगलसराय पुलिस और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू की। सर्विलांस टीम की मदद से पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों और संपर्कों को खंगाला तो एक संगठित गिरोह की जानकारी सामने आई।
दो महिलाओं की शिकायत पर दर्ज हुए थे मुकदमे
पुलिस के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से संबंधित दो शिकायतें थाना मुगलसराय में 27 अगस्त 2026 को प्राप्त हुई थीं। दोनों पीड़िताओं की तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
पहले मामले में आशा देवी ने आरोप लगाया कि 14 मई 2026 को नौकरी दिलाने के बहाने उन्हें रामनगर से ग्राम डहिया स्थित एक मकान में ले जाया गया। वहां मौजूद कुछ लोगों और खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाली एक महिला ने उन्हें डराया-धमकाया तथा उनके साथ मारपीट और गलत हरकत की।
पीड़िता के अनुसार, एक युवक के साथ उनका वीडियो बनाया गया और उसे परिजनों को वायरल करने की धमकी देकर फिरौती मांगी गई। करीब दो दिन तक बंधक रखने के बाद परिजनों द्वारा लगभग 30 हजार रुपये भेजे जाने पर 15 मई को उन्हें छोड़ा गया। इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया और फोन-पे के माध्यम से करीब 75 हजार रुपये जबरन ट्रांसफर कराने का आरोप है।
इस मामले में थाना मुगलसराय में मुकदमा अपराध संख्या 444/2026 दर्ज किया गया।
मकान देखने के बहाने बुलाकर बंधक बनाने का आरोप
दूसरे मामले में आयशा ने पुलिस को बताया कि 16 अगस्त 2026 को ऑनलाइन मकान देखने के सिलसिले में आरोपी उन्हें रामनगर चौराहे से ग्राम डहिया स्थित एक मकान में ले गए। वहां तीन अज्ञात पुरुषों और एक महिला ने उन्हें कमरे में बंधक बना लिया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनके कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाया और उसे वायरल करने की धमकी देते हुए पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई। आरोपियों ने मोबाइल फोन छीनकर उनके पति को कॉल किया और फिरौती की रकम मांगी। इसके बाद फोन-पे के माध्यम से उनके बैंक खाते से कथित तौर पर 1.14 लाख रुपये भी ट्रांसफर कर लिए गए।
पीड़िता के मुताबिक, वह रात में किसी तरह छतों के रास्ते भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहीं। इस मामले में थाना मुगलसराय में मुकदमा अपराध संख्या 443/2026 दर्ज किया गया है।
एस्कॉर्ट सर्विस में ठगी के बाद बदला लेने की योजना
पुलिस की विवेचना में गिरोह के कथित सरगना विजय कुमार गुप्ता उर्फ संजय गुप्ता उर्फ रॉकी का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, विजय कुमार पहले लोकांटो वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन एस्कॉर्ट सेवा संचालित करता था। वर्ष 2023 में एक एस्कॉर्ट महिला द्वारा उसके साथ ठगी किए जाने के बाद उसने एस्कॉर्ट महिलाओं से बदला लेने की योजना बनाई।
पुलिस का दावा है कि इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया। गिरोह की कथित कार्यप्रणाली के तहत महिलाओं को नौकरी अथवा मकान दिलाने का झांसा देकर निर्धारित स्थान पर बुलाया जाता था। इसके बाद उन्हें एक मकान में ले जाकर बंधक बनाया जाता और फर्जी पुलिस टीम का भय दिखाया जाता था।
आरोप है कि महिलाओं के अश्लील फोटो-वीडियो बनाए जाते थे। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िताओं और उनके परिजनों से ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन माध्यम से धन की मांग की जाती थी।
महिला आरोपी खुद को बताती थी सीबीआई अधिकारी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार अंजली गुप्ता गिरोह में अहम भूमिका निभाती थी। आरोप है कि वह खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिलाओं को डराती और धमकाती थी। पुलिस के मुताबिक, फर्जी एवं कूटरचित पहचान पत्रों का इस्तेमाल करने के साथ बैंक खातों के माध्यम से कथित फिरौती की रकम प्राप्त करने और गिरोह के वित्तीय लेनदेन को प्रबंधित करने में भी उसकी भूमिका थी।
वहीं पुलिस के अनुसार, विशम्भर विश्वकर्मा महिलाओं को बुक करने के बाद रामनगर चौराहे से बद्रीपुरम स्थित मकान तक लाने का काम करता था। मकान में गिरोह के सदस्य महिलाओं को बंधक बनाने और वीडियो तैयार करने के साथ कथित रूप से धन उगाही करते थे।
डहिया में दबिश देकर चारों को पकड़ा
वांछित आरोपियों की तलाश के दौरान थाना मुगलसराय पुलिस और साइबर थाना की टीम ने सर्विलांस टीम की मदद से 28 अगस्त को मुखबिर की सूचना पर डहिया बद्रीपुरम कॉलोनी स्थित एक मकान की घेराबंदी की। पुलिस टीम ने मकान पर दबिश देकर मौके से तीन पुरुष और एक महिला को हिरासत में लिया।
पुलिस के मुताबिक, बाद में वादिनीगण द्वारा आरोपियों की पहचान भी की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय कुमार गुप्ता उर्फ संजय गुप्ता उर्फ रॉकी, कृष्ण कुमार गुप्ता, विशम्भर विश्वकर्मा और अंजली गुप्ता के रूप में हुई है।
विजय कुमार गुप्ता और कृष्ण कुमार गुप्ता प्रयागराज के शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के खान सेमरा गांव के निवासी बताए गए हैं। वर्तमान में दोनों के मुगलसराय थाना क्षेत्र के हमीदपुर में रहने की जानकारी पुलिस ने दी है। विशम्भर विश्वकर्मा वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र के सुजाबाद का निवासी है। अंजली गुप्ता विजय कुमार गुप्ता की पत्नी बताई गई है।
आठ मोबाइल और 72 हजार रुपये नकद बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न कंपनियों के आठ एंड्रॉइड मोबाइल फोन और 72,300 रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा नौ एटीएम कार्ड, पांच फर्जी अथवा कूटरचित आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, श्रम कार्ड और कोविड कार्ड बरामद हुए हैं।
पुलिस को यूनियन बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक समेत विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेकबुक भी मिली हैं। एक पोर्टेबल वाईफाई डिवाइस और एक टॉर्चर किट भी बरामद की गई है।
इसके साथ ही घटना में प्रयुक्त एक स्कूटी संख्या UP70HJ7170 और पल्सर मोटरसाइकिल संख्या MP19MN1166 बरामद हुई है। पुलिस ने दोनों वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया है।
मुकदमों में बढ़ाई गईं अतिरिक्त धाराएं
पुलिस के मुताबिक, विवेचना और बरामदगी के आधार पर मुकदमों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(2), 338 और 336(2) की बढ़ोतरी की गई है। मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गिरोह ने अब तक कितनी महिलाओं को निशाना बनाया और उनसे कितनी रकम की उगाही की गई। बरामद मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से गिरोह के नेटवर्क और इससे जुड़ी अन्य घटनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
संयुक्त टीम ने की गिरफ्तारी
गिरफ्तारी और बरामदगी की कार्रवाई थाना मुगलसराय प्रभारी अर्जुन सिंह के नेतृत्व में की गई। टीम में उपनिरीक्षक सूरज, साइबर थाना के उपनिरीक्षक अभिषेक शुक्ला, हेड कांस्टेबल सनोज सिंह, राकेश सिंह, अभिषेक सिंह, अरविन्द यादव, सर्विलांस टीम के कांस्टेबल मंटू सिंह, कांस्टेबल सुनील कुमार गुप्ता, मोहन सैनी और महिला कांस्टेबल रिंशू सिंह शामिल रहीं।
पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना अभी जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच के आधार पर गिरोह की कथित गतिविधियों से जुड़े अन्य लोगों तथा पीड़ित महिलाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।