न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की टिप्पणी से नया विवाद खड़ा हो गया है। आयोग के अधिकारियों ने वॉशिंगटन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऐसे सदस्यों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माना जाता है। साथ ही अमेरिकी प्रशासन से संघ के नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों और राजनयिक शिष्टाचार से दूर रखने की अपील की गई है।
1. भागवत के अमेरिका दौरे से पहले बयान
USCIRF की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियों की चर्चा चल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक संघ प्रमुख 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में ‘Universal Oneness Celebrations’ कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करने वाले हैं। कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD) की ओर से किया जा रहा है।
2. अमेरिकी अधिकारियों से क्या कहा गया?
USCIRF आयुक्त जीन मिल्स ने कहा है कि RSS नेताओं को, भले ही उनका संबंध भारतीय सरकार से हो, उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक सुविधाओं से सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए। उनकी जगह अमेरिकी सरकार को उन RSS सदस्यों पर कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता या आस्था की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया गया है।
3. लक्षित प्रतिबंध की सिफारिश
आयोग की मांग केवल सामान्य राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है। USCIRF की 2026 वार्षिक रिपोर्ट में RSS का नाम उन संस्थाओं में शामिल है, जिन पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में संबंधित व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की संपत्तियां फ्रीज करने और उन्हें अमेरिका में प्रवेश से रोकने जैसे उपायों का उल्लेख किया गया है।
4. धार्मिक स्वतंत्रता को बनाया आधार
USCIRF का मुख्य तर्क भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति से जुड़ा है। आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति, कथित हिंसा, भेदभाव और धार्मिक अधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में RSS को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन के लिए प्रतिबंधात्मक कदमों की सिफारिश की गई है।
5. आयोग की सिफारिश अंतिम सरकारी फैसला नहीं
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि USCIRF अमेरिकी सरकार का कोई मंत्रालय नहीं है और उसकी सिफारिश अपने आप में कानूनी प्रतिबंध नहीं बन जाती। आयोग धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस को नीतिगत सुझाव देता है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने RSS पर प्रतिबंध लगा दिया है। मौजूदा स्थिति यह है कि आयोग ने कार्रवाई की सिफारिश की है।
6. न्यूयॉर्क में प्रस्तावित कार्यक्रम
मोहन भागवत के 29 अगस्त के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर आयोजकों की ओर से बताया गया है कि ‘Universal Oneness Celebrations’ में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव जैसे विषयों पर जोर दिए जाने की बात कही गई है।
7. RSS को लेकर अमेरिकी संस्था का रुख
USCIRF लंबे समय से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित परिस्थितियों पर अपनी रिपोर्ट जारी करता रहा है। वर्ष 2026 की रिपोर्ट में आयोग ने भारत को ‘Country of Particular Concern’ की श्रेणी में रखने की सिफारिश की है। इसी दस्तावेज में RSS समेत कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई की बात कही गई है।
8. भारत और USCIRF के बीच पहले से मतभेद
भारत और USCIRF के बीच धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं। भारतीय पक्ष आयोग की रिपोर्टों और टिप्पणियों को कई अवसरों पर पक्षपातपूर्ण तथा भारत की जमीनी परिस्थितियों का सही आकलन नहीं करने वाला बताता रहा है। दूसरी ओर USCIRF अपने आकलनों को धार्मिक स्वतंत्रता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित बताता है।
9. बयान से बढ़ी कूटनीतिक चर्चा
मोहन भागवत के दौरे से कुछ दिन पहले आई इस टिप्पणी ने मामले को राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच संघ प्रमुख के कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी आयोग ने संभावित आधिकारिक संपर्कों पर सवाल उठाया है। इससे आगामी यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों और RSS नेतृत्व के बीच किसी संभावित मुलाकात को लेकर भी अटकलें बढ़ गई हैं।
10. आगे अमेरिकी प्रशासन के रुख पर नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अमेरिकी सरकार USCIRF की सिफारिश पर क्या रुख अपनाती है। आयोग की मांग को स्वीकार करना, उस पर विचार करना या उसे नजरअंदाज करना अमेरिकी प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है। यदि वॉशिंगटन इस मामले में कोई औपचारिक निर्णय लेता है तो उसका असर भारत-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार से जुड़े द्विपक्षीय संवाद पर भी पड़ सकता है।
11. विवाद के बीच भागवत का दौरा
फिलहाल मोहन भागवत का प्रस्तावित न्यूयॉर्क कार्यक्रम अपनी जगह निर्धारित बताया जा रहा है। USCIRF की आपत्ति के बाद इस यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूर तेज हो गई है। संघ प्रमुख के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
12. निष्कर्ष
USCIRF की ताजा मांग ने RSS को लेकर अमेरिका में चल रही बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। आयोग ने अमेरिकी प्रशासन से धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार RSS सदस्यों पर लक्षित कार्रवाई तथा संघ नेतृत्व को उच्चस्तरीय आधिकारिक संपर्क से दूर रखने की अपील की है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार की ओर से RSS पर कोई नया प्रतिबंध लगाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को USCIRF की सिफारिश और अमेरिकी प्रशासन के सामने रखी गई मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।