भरदुवा में अतिक्रमण हटाने के दौरान पथराव और हमले का आरोप, एसडीएम के गार्ड समेत नौ घायल; करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि कब्जामुक्त कराने का दावा
नौगढ़, चंदौली। नौगढ़ तहसील क्षेत्र के भरदुवा गांव में वन भूमि से कथित अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम को बुधवार को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब ग्रामीणों और संयुक्त टीम के बीच झड़प हो गई। पुलिस के अनुसार टीम पर पथराव, मिट्टी फेंकने तथा लाठी-डंडे और तीर-धनुष से हमला करने के आरोप लगाए गए हैं। घटना में उपजिलाधिकारी के सुरक्षा गार्ड सहित राजस्व और वन विभाग के कुल नौ कर्मचारियों के घायल होने की सूचना है। मामले में पुलिस ने 14 नामजद पुरुषों और छह महिलाओं समेत करीब 150 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में सरकारी कार्य में बाधा डालने, अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मारपीट, पथराव और हमला करने सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस के अनुसार मामला भरदुवा गांव के भैसोड़ा कंपार्टमेंट संख्या-14 की वन भूमि से जुड़ा है। वन विभाग और प्रशासन को इस क्षेत्र में सरकारी वन भूमि पर कथित रूप से अतिक्रमण कर खेती किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के निर्देश पर राजस्व, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम 19 अगस्त को कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची। एफआईआर में घटना का समय दोपहर करीब 12:30 बजे दर्ज किया गया है।
खेत में चल रहा था जुताई और रोपाई का काम
प्राथमिकी के अनुसार, जब संयुक्त टीम मौके पर पहुंची तो वहां ट्रैक्टर से जमीन की जुताई और धान की रोपाई का कार्य किया जा रहा था। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को सरकारी वन भूमि पर खेती नहीं करने तथा अतिक्रमण हटाने के लिए कहा। प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई शुरू की तो ग्रामीणों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी। पुलिस के मुताबिक देखते ही देखते मौके पर करीब 100 से 150 लोग एकत्र हो गए।
अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को समझाने और स्थिति शांत रखने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों की ओर से कार्रवाई रोकने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। इसी दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी बढ़ गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन का कहना है कि टीम सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई कर रही थी, जबकि ग्रामीणों की ओर से भूमि पर अपने अधिकार और वर्षों से खेती किए जाने का दावा किए जाने की बात सामने आई है।
पथराव में नौ लोगों के घायल होने की सूचना
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि विरोध कर रही भीड़ की ओर से संयुक्त टीम पर ईंट-पत्थर और मिट्टी फेंकी गई। अचानक हुए पथराव से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों ने लाठी-डंडे, तीर-धनुष और अन्य साधनों से टीम के सदस्यों पर हमला किया। पथराव की घटना में उपजिलाधिकारी के सुरक्षा गार्ड मोहन यादव के सिर में चोट लगने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा लेखपाल, वन दरोगा, वनरक्षक और महिला कर्मचारी सहित कुल नौ लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों को उपचार के लिए भेजा गया। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित किया और भीड़ को हटाया।
करीब 30 हेक्टेयर भूमि कब्जामुक्त कराने का दावा
प्रशासन की ओर से कार्रवाई के दौरान करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा किया गया है। कार्रवाई में खेतों में लगी धान और मिर्च की फसल हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि वन विभाग के अभिलेखों में सरकारी वन भूमि है और वहां अवैध कब्जे की शिकायत के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। अतिक्रमण हटाने के बाद प्रशासन ने दोबारा कब्जा होने से रोकने के लिए भी कदम उठाया। बताया गया कि चार जेसीबी मशीनों की मदद से खाली कराई गई वन भूमि के आसपास सुरक्षा खाई खोदी गई। इसका उद्देश्य भविष्य में दोबारा खेती या अन्य माध्यम से अतिक्रमण किए जाने की संभावना को रोकना है।
14 पुरुष और छह महिलाएं नामजद
घटना को लेकर नौगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। उपलब्ध एफआईआर की प्रति के अनुसार मुकदमा संख्या 0087 दर्ज है और घटना की तारीख 19 अगस्त 2026 अंकित है। मामले में 14 पुरुषों और छह महिलाओं को नामजद किया गया है, जबकि करीब 150 लोगों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। नामजद आरोपियों में भरदुवा, विशेषरपुर और आसपास के गांवों के लोगों के नाम-पते दर्ज होने की बात सामने आई है।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 191(3), 190, 109, 352, 351(2), 221, 121(1) और 132 का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 1932 की धारा सात तथा भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 के तहत भी कार्रवाई की गई है।
पुलिस अब नामजद आरोपियों के साथ-साथ घटना के दौरान मौके पर मौजूद अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा सकती है।
वन भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद
नौगढ़ क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण और खेती का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। वन विभाग का पक्ष है कि सरकारी वन भूमि पर कब्जा कर खेती करना नियमों के विरुद्ध है और ऐसे अतिक्रमण को हटाना विभाग की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर कई ग्रामीण वन भूमि पर वर्षों से खेती करने तथा अपने अधिकार का दावा करते रहे हैं। यही वजह है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई बार ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा होती रही है।
भरदुवा की घटना ने एक बार फिर इस विवाद को गंभीर रूप से सामने ला दिया है। ग्रामीणों की फसल हटाए जाने से उनके बीच नाराजगी बढ़ने की बात भी सामने आई है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में उनकी मेहनत और धन लगा था। हालांकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई जिस भूमि पर की गई, वह वन विभाग के अभिलेखों में सरकारी भूमि दर्ज है।
पुराने मामलों से अलग है भरदुवा की घटना
नौगढ़ क्षेत्र में वन भूमि से जुड़े विवाद और सरकारी टीम के विरोध की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि पुलिस और प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि पूर्व की घटनाओं में दर्ज मुकदमों की संख्या या आरोपियों को वर्तमान भरदुवा प्रकरण से नहीं जोड़ा जाए। अप्रैल 2026 में जयमोहनी रेंज में वन विभाग की टीम से अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा के मामले में ग्राम प्रधान सहित 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। यह अलग घटना थी। इसी तरह मई 2026 में गंगापुर बीट के भैसोड़ा कंपार्टमेंट संख्या-7 में अतिक्रमण हटाने के दौरान वन विभाग की टीम पर पथराव की घटना की भी जानकारी सामने आई थी। इन पुराने मामलों का भरदुवा की 19 अगस्त की घटना से सीधा संबंध नहीं माना जा सकता।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक भूमिका
मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस की विवेचना महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह जांच करेगी कि मौके पर कितने लोग मौजूद थे, पथराव किसने किया, सरकारी कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट में कौन-कौन शामिल था और किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही। इसके लिए मौके के वीडियो, फोटो, पुलिस और प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होना उसके दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस की विवेचना के बाद ही होगी।
फिलहाल भरदुवा में करीब 30 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराने का प्रशासन ने दावा किया है। दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए सुरक्षा खाई भी खोदी गई है। वहीं घटना के बाद दर्ज मुकदमे में 14 पुरुषों और छह महिलाओं समेत करीब 150 लोगों को आरोपी बनाए जाने से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। प्रशासन के सामने अब एक ओर सरकारी वन भूमि को सुरक्षित रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर ग्रामीणों के भूमि संबंधी दावों और शिकायतों का विधिक तरीके से समाधान करने की जिम्मेदारी भी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही पूरे मामले की तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी।