चंदौली। वनाधिकार अधिनियम के तहत जमीन पर दावेदारी करने वाले नौगढ़ क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों के लिए गुरुवार का दिन महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में 20 अगस्त को वनाधिकार समिति की आठवीं बैठक आयोजित की जाएगी। कलेक्ट्रेट सभागार में सुबह 11 बजे प्रस्तावित इस बैठक में नौगढ़ विकासखंड के 15 गांवों से जुड़े लंबित वनाधिकार प्रार्थनापत्रों पर सुनवाई की जाएगी। संबंधित आवेदकों को व्यक्तिगत रूप से अपने मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
वनाधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दावों की प्रक्रिया में ग्राम सभा और उपखंड स्तरीय समिति से प्राप्त आख्या का परीक्षण महत्वपूर्ण चरण है। प्रस्तावित बैठक में लंबित मामलों से संबंधित अभिलेखों और पूर्व में प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर दावों की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन की ओर से लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
15 गांवों के आवेदकों को बुलाया गया
वनाधिकार से जुड़े लंबित मामलों की सुनवाई के लिए नौगढ़ विकासखंड के 15 गांवों के आवेदकों को बुलाया गया है। इनमें धनकुंवारी, पड़रिया, तेंदुआ नरकटी, मझगाई, बोदलपुर, अमदहां, चरनपुर, तेंदुआ, शमशेरपुर, विशेषरपुर, रामपुर चिकनवा, देवरा, बोझ, जयमोहनी पोस्ता और सोनवार गांव शामिल हैं। इन गांवों के संबंधित आवेदकों को अपने दावों से जुड़े मूल दस्तावेजों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित होने को कहा गया है।
लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। वनाधिकार पट्टे के लिए दावा करने वाले परिवारों का कहना है कि उनके आवेदन लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली सुनवाई से उनके प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अधिकारियों को रिकॉर्ड के साथ उपस्थित रहने के निर्देश
बैठक को लेकर संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक अभिलेखों के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रभागीय वनाधिकारी, काशी वन्यजीव प्रभाग रामनगर, जिला समाज कल्याण अधिकारी और उप जिलाधिकारी नौगढ़ सहित संबंधित अधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा संबंधित रेंज अधिकारियों को भी गांवों के आवेदकों तक सूचना पहुंचाने और उन्हें बैठक में उपस्थित कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासन की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि लंबित दावों की सुनवाई के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी और जरूरी रिकॉर्ड एक ही स्थान पर उपलब्ध रहें। इससे दावों की जांच और उनके संबंध में निर्णय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।
ग्राम सभा और उपखंड स्तरीय समिति की रिपोर्ट भी होगी अहम
वनाधिकार अधिनियम के तहत किसी दावे पर विचार करते समय संबंधित स्तर पर तैयार की गई रिपोर्टों का परीक्षण किया जाता है। प्रस्तावित बैठक में ग्राम सभा और उपखंड स्तरीय समिति से प्राप्त आख्या को भी देखा जाएगा। इसके साथ ही आवेदकों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और उपलब्ध अभिलेखों का मिलान किया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र दावेदारों के मामलों का नियमानुसार निस्तारण करना है। जिन मामलों में दस्तावेज और साक्ष्य पर्याप्त पाए जाएंगे, उनमें नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं किसी मामले में अतिरिक्त दस्तावेज या जांच की आवश्यकता सामने आने पर संबंधित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
वर्षों से अधिकार की आस लगाए बैठे परिवार
नौगढ़ क्षेत्र में वनाधिकार से जुड़े मामलों को लेकर ग्रामीण लंबे समय से अपने अधिकार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वन क्षेत्र से लगे गांवों में रहने वाले परिवारों के लिए जमीन उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में वनाधिकार अधिनियम के तहत उनके दावों को मान्यता मिलना आर्थिक और सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्रामीणों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सुनवाई के दौरान उनके मामलों में क्या निर्णय होता है। कई परिवारों को उम्मीद है कि उनके दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद पात्र पाए जाने पर उनके दावों के निस्तारण की दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
कलेक्ट्रेट सभागार में होगी बैठक
जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं वनाधिकार समिति के सचिव की ओर से संबंधित अधिकारियों को बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक का स्थान कलेक्ट्रेट सभागार और समय सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया है। आवेदकों को भी निर्धारित समय पर मूल दस्तावेजों के साथ पहुंचने के लिए कहा गया है।
प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए जाने से इस सुनवाई की अहमियत और बढ़ गई है। हालांकि प्रत्येक दावे का अंतिम निर्णय संबंधित दस्तावेजों, रिपोर्टों और वनाधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही होगा।
सुनवाई के बाद साफ होगी आगे की तस्वीर
20 अगस्त की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि 15 गांवों से जुड़े कितने मामलों में तत्काल निर्णय की स्थिति बनती है और कितने प्रकरणों में अतिरिक्त जांच या दस्तावेज की आवश्यकता पड़ती है। फिलहाल प्रशासन ने लंबित मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर संबंधित आवेदकों और अधिकारियों को आवश्यक तैयारी के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
वनाधिकार दावों की यह सुनवाई नौगढ़ क्षेत्र के उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से अपने प्रकरणों के निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली वनाधिकार समिति की बैठक पर टिकी हैं। सुनवाई में दस्तावेजों और संबंधित समितियों की रिपोर्ट के आधार पर मामलों की समीक्षा की जाएगी और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई तय होगी।
स्रोतों के अनुसार बैठक 20 अगस्त को सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में प्रस्तावित है और इसमें नौगढ़ विकासखंड के 15 गांवों के लंबित वनाधिकार प्रकरणों पर सुनवाई होनी है।