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GOAL द्वारा मनाया गया 'समता दिवस'

रिपोर्ट - संजय कुमार 'दिनकर',  मीडिया प्रभारी GOAL

भारत / आंबेडकरवादी साहित्यकारों के वैश्विक संगठन GOAL के द्वारा दिनांक 20 मार्च को 'महाड सत्याग्रह दिवस के अवसर पर ऑनलाइन 'समता दिवस' मनाया गया । इस अवसर पर 'समतावाद' के प्रचार-प्रसार के बारे में विचार-विमर्श किया गया तथा हर वर्ष 'समता दिवस' मनाने का निर्णय लिया गया । साथ ही, आंबेडकरवादी कवियों द्वारा काव्यपाठ भी किया गया । कार्यक्रम का संचालन GOAL के कोषाध्यक्ष डाॅ. बुद्धप्रिय सुरेश सौरभ गाजीपुरी ने किया ।

GOAL के अध्यक्ष डॉ. राम मनोहर राव ने समता दिवस मनाने का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि संवैधानिक रूप से सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं, जिन्हें व्यवहार में लाने हेतु लोगों को जागरूक करना है । समता दिवस मनाने का एक उद्देश्य यह भी है कि स्त्रीवाद के नाम पर भटके हुए लोगों को सही दिशा मिल सके । क्योंकि समतावाद में नारीवाद अथवा पुरुषवाद के लिए कोई स्थान नहीं है ।

GOAL के संरक्षक श्यामलाल राही 'प्रियदर्शी' ने अपने वक्तव्य में कहा कि समता तीन प्रकार की होती है - राजनैतिक समता, सामाजिक समता और आर्थिक समता । राजनैतिक रूप से सभी को चुनाव लड़ने का समान अधिकार प्राप्त है । चुनाव जीतकर हमारे जो प्रतिनिधि विधानसभा अथवा लोकसभा में जाते हैं, वे गूँगे और बहरे हैं । सामाजिक समता स्त्री-पुरुष दोनों को समानता का अधिकार देती है । स्त्री को पुरुष की आवश्यकता है, पुरुष को स्त्री की आवश्यकता है । दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते हैं । आर्थिक समता के मामले में अभी तक वंचित-वर्ग के लोग बहुत पीछे हैं ।

GOAL के उपाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि युवा पीढ़ी आंबेडकरवाद से मरहूम है । युवाओं (लड़का और लड़की दोनों) को आंबेडकरवाद की सही समझ नहीं है । इसलिए समता दिवस मनाना बहुत जरूरी है ।

GOAL के महासचिव देवचंद्र भारती 'प्रखर' ने समता दिवस मनाने का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि संवैधानिक रूप से सभी को समता का अधिकार प्राप्त है, इसलिए स्त्रीवाद की बात करना गलत है । स्त्रीवादी लोग समतावाद के विरुद्ध काम कर रहे हैं तथा वे आंबेडकरवाद को गलत दिशा में ले जा रहे हैं । समतावाद बनाने का यही उद्देश्य है कि आंबेडकरवाद सही दिशा में आगे बढ़ता रहे । हर वर्ष समता दिवस मनाया जाएगा, जिसमें समान रूप से स्त्री, पुरुष, किन्नर तथा अन्य वंचित-वर्ग के लोगों को सम्मानित किया जाएगा ।

'समता दिवस' पर हुआ काव्यपाठ 

GOAL द्वारा आयोजित 'समता दिवस' के अवसर पर आंबेडकरवादी कवियों ने काव्यपाठ भी किया । GOAL के उपाध्यक्ष मनोहर लाल प्रेमी ने एक समसामयिक गीत 'जब तक ईवीएम से वोट डाले जाएँगे/बेईमानों से कभी ना जीत पाएँगे' का सस्वर वाचन किया । डॉ. बुद्धप्रिय सुरेश सौरभ गाजीपुरी ने सुनाया - 'मेरे देश की आजादी त्रियुद्ध माँगती है/संपूर्ण भारत देश में वह बुद्ध माँगती है/समता नहीं दिखाई दे रही है यहाँ पर/GOAL वालों के जैसे प्रबुद्ध माँगती है ।' रघुवीर सिंह 'नाहर' ने अपनी प्रस्तुति देते हुए सुनाया - 'बातों से बुझती नहीं, कभी पेट की आग/बहुत दिनों से सुन रहे, जाग मुसाफिर जाग ।'; 'गैरों की औकात क्या, हमसे करें सवाल/अपने ही नासूर बन, फैलाते हैं जाल ।' GOAL के संयुक्त सचिव नीरज कुमार नेचुरल ने सुनाया - 'अब जहाँ भी विषमता है, उसे सहने वाला ही कायर है ।' श्यामलाल राही 'प्रियदर्शी' जी ने सुनाया - 'तुमने अभी समझा नहीं परिवार क्या है राही/परिवार का सारा बोझ है ढोकर नहीं देखा ।' देवचंद्र भारती 'प्रखर' ने सुनाया - 'समता है क्या इस बात का जिनको नहीं संज्ञान है/वे नारीवादी कर रहे एक लिंग का गुणगान हैं/सत्ता पिता की हो, नहीं उनको तनिक स्वीकार है/माता की सत्ता के लिए वे कर रहे संधान है ।' डॉ. राम मनोहर राव ने कार्यक्रम का समापन करते हुए एक सजल सुनाया - 'हम तो हैं एक समान, फ़र्क करे कोई तो किया करे/करते हैं हम प्रेम, नफ़रत करे कोई तो किया करे ।'

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