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रविदास जी ने जातिगत भेदभाव को मिटाने, समानता का संदेश देने और मानव गरिमा के लिए निस्वार्थ योगदान दिया: अर्जुन आर्या

समाज में फैली कुरीतियों, ऊंच-नीच और छुआछूत का विरोध किया, कहा व्यक्ति अपने जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है, देश विदेश में मनाई गई 649वीं जयंती,

धानापुर,(चंदौली)। क्षेत्र के बभनियांव में संत रविदास जी की 649वीं जयंती बड़े ही श्रद्धा और हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। श्रद्धालुओं ने मत्था टेक उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया।

फोटो: अर्जुन प्रसाद आर्य बभनियांव में रविदास जयंती पर लोगों को संबोधित करते हुए 

कार्यक्रम के बतौर मुख्य अतिथि लॉर्ड बुद्धा डॉ अंबेडकर सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन प्रसाद आर्य ने कहा कि संत रविदास मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में जातिगत भेदभाव को मिटाने, समानता का संदेश देने और मानव गरिमा के लिए निस्वार्थ योगदान दिया। अपनी वाणियों के माध्यम से ज्ञान, प्रेम और मानवता का मार्ग दिखाया। वे सामाजिक समानता के समर्थक थे।

 उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों, ऊंच-नीच और छुआछूत का विरोध किया और समानता का संदेश दिया। उनका मानना था कि "व्यक्ति अपने जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है"। वे मानते थे कि "सच्चा धर्म बाहरी आडंबरों से दूर मानवता की सेवा में है, न कि कर्मकांडों में"। 

उन्होंने एक ऐसे आदर्श समाज का सपना देखा जिसे 'बेगमपुरा' (बिना गम का शहर) कहा, जहाँ कोई भेदभाव न हो। उनकी शिक्षाएँ और दोहे, जो समानता और भाईचारे को बढ़ावा देते थे, आज भी बेहद प्रासंगिक हैं। कबीरदास जी ने भी उन्हें संतों में सबसे ऊपर माना था, जिसके बाद उन्हें संत शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया गया। आज इनकी 649वीं जयंती है, जो देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है।

इस दौरान प्रतीक्षा हॉस्पिटल के प्रोपराइटर डॉ अश्वनी कुमार, पूर्व प्रधानाध्यापक राजनाथ राम, त्रिलोकी नाथ, चंद्रशेखर, मो. मेराज खान, राजेश कुमार, अमरजीत, सुरेश, महेंद्र कुमार, भानु प्रताप, राजेश कुमार, सुनील कुमार, संजय कुमार, सर्वेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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