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नया 'कानून' जुमलों का पुलिंदा: मनरेगा बहाल करो, जी राम जी रद्द करो

200 दिन काम, 700 रुपए दैनिक मजदूरी दो - अजय राय

चंदौली। एआईपीएफ राष्ट्रीय फ्रंट कमेटी सदस्य और किसान-मजदूर नेता अजय राय ने पुरानी मनरेगा योजना की ताकत को याद दिलाते हुए नई विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन अधिनियम पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह नई योजना ग्रामीण मजदूरों को रोजगार से वंचित करेगी, किसानों का नुकसान करेगी और ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों को ठप कर देगी। अजय राय ने साफ कहा, "मोदी सरकार ने मनरेगा को चुपचाप खत्म कर इस जल्दबाजी वाली योजना थोप दी, जो मजदूरों के हक छीनने का काला कानून है।"

मनरेगा: ग्रामीण भारत का मजबूत कवच
मनरेगा की कहानी 5 सितंबर 2005 से शुरू होती है, जब संसद में लंबी चर्चा के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (नरेगा) लागू हुआ। महात्मा गांधी के नाम से जोड़कर इसे मनरेगा कहा गया। यह कानून ग्रामीण मजदूरों—चाहे नौजवान, महिला, विकलांग या बुजुर्ग—के लिए वरदान साबित हुआ। 100 दिन की गारंटी, सालाना 100 दिन रोजगार का अधिकार, तुरंत भुगतान, काम मांगने पर 15 दिनों में नौकरी, वरना बेरोजगारी भत्ता, 5 किमी दूर काम पर किराया, काम स्थल पर पानी, दवा, छाया, पुरुष-महिला को बराबर मजदूरी, ठेकेदार-मशीन पर बैन, ग्राम सभा बनाए परियोजनाएं। इस योजना ने लाखों परिवारों को पलायन से रोका और गांवों में सड़क, तालाब, खेतों की खुदाई जैसे कार्यों से विकास को पंख दिए।

मोदी सरकार का धोखा: बजट कटौती से मनरेगा की कमर टूटी
सत्ता में आते ही मनरेगा के साथ खिलवाड़ शुरू हो गया। जरूरी बजट कभी नहीं मिला—पक्के कार्यों का पैसा सालों से बकाया, मजदूरी महीनों से अटकी। औसत रोजगार कभी 50 दिन से ऊपर नहीं पहुंचा। किसान-मजदूर संगठन 200 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की मांग करते रहे, लेकिन सरकार ने 21 दिसंबर 2025 को एक झटके में मनरेगा खत्म कर वी बी-जी राम जी ला पटका।

नया कानून 'जी राम जी' जुमलों का पुलिंदा है : मजदूर-विरोधी जाल है। केवल 125 दिन का झांसा दिया गया है। जबकि फसल मौसम में 60 दिन कटौती, यानी कुल रोजगार घटेगा।
केंद्र-राज्य 60:40 का अनुपात राज्यों पर बोझ। ठेकेदारों की खुली छूट। मशीनें आएंगी, मजदूर जाएंगे। पंचायतें बाहर। ग्राम सभा की भूमिका खत्म, विकास रुकेगा।
हक छिन गए: कोई गारंटी नहीं, भुगतान में देरी, सुविधाओं का नामोनिशान नहीं।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में 46% भूमिहीन और 70% ग्रामीण आबादी रोजगार के भूखे हैं। बिना भूमि सुधार और 200 दिन गारंटी के पलायन रुकेगा कैसे? महंगाई के इस दौर में केंद्र की ₹57 प्रतिदिन की 'गरीबी रेखा' भुखमरी रेखा से भी नीचे है।

मांग: पुराना मनरेगा लौटाओ, VB-G RAM G रद्द करो
अजय राय ने ऐलान किया, "मजदूर-किसान मंच और एआईपीएफ मनरेगा बहाली, वी बी-जी ग्राम जी रद्द, 200 दिन रोजगार और ₹700 दैनिक मजदूरी की मांग पर सड़क पर उतरेंगे। केंद्र सरकार करोड़ों जिंदगियों से खिलवाड़ बंद करे!" यह लड़ाई ग्रामीण भारत के भविष्य की है—क्या आप साथ देंगे?

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