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प्रकृति की बेरुखी के आगे फीके पड़े सारे भौतिक संसाधन, नहर, नलकूप और बिजली व्यवस्था सब बेअसर: पिंटू पाल

चंदौली। धान उत्पादन के लिए प्रदेशभर में अपनी विशेष पहचान रखने वाला चंदौली जनपद इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। धान की रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण दौर में खेतों में हरियाली के बजाय सूखी मिट्टी और धूल दिखाई दे रही है। बारिश की कमी के साथ-साथ नहरों में पानी का अभाव, सरकारी नलकूपों की निष्क्रियता और अनियमित बिजली आपूर्ति ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। सिंचाई के अभाव में धान की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

किसान नेता पिंटू पाल ने जिले में उत्पन्न इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति की बेरुखी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, लेकिन इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि सरकारी सिंचाई व्यवस्था और बिजली आपूर्ति भी किसानों को राहत देने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई, तो धान की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक पुरानी कहावत प्रचलित है— "पानी को देख के पानी होत, धन देख के धन।" उनका कहना है कि जब अच्छी बारिश होती है तो नहरें भी लबालब रहती हैं और किसानों को सिंचाई की परेशानी नहीं होती। लेकिन जब वर्षा कम होती है, तब किसानों की उम्मीद सरकारी नहरों, नलकूपों और निर्बाध बिजली आपूर्ति पर टिकी रहती है। वर्तमान समय में तीनों व्यवस्थाएं प्रभावित हैं, जिसके कारण खेतों तक समय पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

पिंटू पाल ने कहा कि जिले के कई क्षेत्रों में सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं या उनकी क्षमता पर्याप्त नहीं है। वहीं, बिजली की अनियमित आपूर्ति और लो-वोल्टेज के कारण निजी ट्यूबवेल भी प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इससे किसान महंगे डीजल पंपों के सहारे सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से मांग की कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए नहरों में तत्काल पानी छोड़ा जाए, बंद पड़े सरकारी नलकूपों और ट्यूबवेलों को पूरी क्षमता से चालू कराया जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा, जिसका सीधा असर किसानों की आय और जिले के कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

किसान नेता ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि यह समय किसानों को राहत देने का है। यदि अभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं तो धान की फसल को बचाया जा सकता है, अन्यथा चंदौली जैसे धान उत्पादक जिले के किसानों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा।

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