रिपोर्ट! संजय कुमार 'दिनकर' [मीडिया प्रभारी GOAL]
इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) : आंबेडकरवादी साहित्यकारों के वैश्विक संगठन GOAL का दूसरा अधिवेशन दिनांक 3 दिसम्बर 2023 को 'आंबेडकरवादी साहित्य सम्मेलन' के रूप में मनाया गया । यह सम्मेलन प्रयागराज (इलाहाबाद) के प्रतिष्ठित राजकीय भाषा विभाग 'हिंदुस्तानी एकेडमी' के सभागार में आयोजित किया गया था, जिसका विषय था - 'साहित्य और समाज के संदर्भ में साहित्य-सम्मेलन की भूमिका' । सम्मेलन में उपस्थित समस्त विद्वान प्राध्यापकों एवं विचारकों ने विषय से संबंधित अपने-अपने तार्किक विचार प्रस्तुत किये । सम्मेलन में GOAL के चार साहित्यकारों की प्रकाशित पुस्तकों का लोकार्पण किया गया । सम्मेलन का संचालन GOAL के सदस्य डाॅ. बुद्धप्रिय सुरेश सौरभ गाजीपुरी जी ने किया ।
सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय (हिंदी विभाग) के असिस्टेंट प्रोफेसर मा. डाॅ. जनार्दन जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि GOAL एक वैश्विक संगठन है, इसलिए इस संगठन को वैश्विक स्तर पर समतावादी चेतना के साहित्य का संग्रह करने का ऐतिहासिक कार्य करना चाहिए । उन्होंने कहा कि लिखित साहित्य के अलावा समतावादी चेतना का साहित्य मौखिक रूप में भी उपलब्ध है, जिसे लौकिक साहित्य कहा जाता है । लौकिक साहित्य का संकलन अवश्य किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि समतावादी चेतना डॉ. भीमराव आंबेडकर जी से पहले गौतम बुद्ध, संत कबीर, संत रविदास, ज्योतिबा फुले आदि महापुरुषों के कथन एवं वाणियों में स्पष्ट दिखाई देती है । डॉ. आंबेडकर जी की समतावादी चेतना का स्रोत इन्हीं महापुरुषों एवं संतों की वाणियाँ हैं ।
विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित इलाहाबाद आर्य कन्या डिग्री कॉलेज प्रयागराज (हिंदी विभाग) की असिस्टेंट प्रोफेसर मा. डॉ. शशि कुमारी जी ने डॉ. जनार्दन जी की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि आंबेडकरवादी संगठनों को पाखंड से बचना चाहिए । उन्होंने कहा कि साहित्य और समाज के बीच बहुत ही गहरा संबंध है । इसलिए साहित्यकारों को साहित्य सृजन के दौरान सामाजिक सरोकारों का बराबर ध्यान रखना चाहिए । उन्होंने GOAL द्वारा आयोजित इस साहित्य सम्मेलन की भूरि-भूरि प्रशंसा की ।
GOAL द्वारा आयोजित इस साहित्य सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय (हिंदी विभाग) के असिस्टेंट प्रोफेसर मा. डाॅ. गाजुला राजू जी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी के द्वारा किये गये साहित्यिक और सामाजिक आंदोलनों का विस्तारपूर्वक विश्लेषण प्रस्तुत किया । उन्होंने कहा कि सामाजिक आंदोलन के लिए बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर को साहित्यिक आंदोलन बहुत जरूरी समझ में आया, इसलिए उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन एवं प्रकाशन किया । बाबा साहेब द्वारा किये गये सामाजिक आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के सामाजिक आंदोलनों 'महाड सत्याग्रह' और 'कलाराम मंदिर प्रवेश' का उद्देश्य वंचित-वर्ग के लोगों को जागरूक करना था, जिससे वंचित लोग संगठित होकर अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए उत्साहित हों । उन्होंने कहा कि संगठन GOAL अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल होगा, ऐसी मुझे आशा है ।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार मा. प्रेमचंद करमपुरी जी ने कहा कि साहित्य से ही सामाजिक क्रांति होती है । एक साहित्यकार को समाज की केवल वर्तमान स्थिति का ही वर्णन नहीं करना चाहिए, बल्कि समाज के भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए । आंबेडकरवादी साहित्यकारों के ऊपर भविष्य-योजना की जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है ।
वैचारिक कार्यक्रम के उपरांत उपस्थित कवियों/कवयित्रियों मा. राधेश प्रताप 'विकास', मा. नीरज कुमार 'नेचुरल', मा. डाॅ. बुद्धप्रिय सुरेश सौरभ गाजीपुरी, मा. सुरेश कुमार राजा, मा. ओमप्रकाश गौतम, मा. सुरेश कुमार अकेला, मा. डॉ. सारिका, मा. मधु गौतम, मा. नरेंद्र सोनकर आदि ने सुंदर एवं प्रेरक काव्यपाठ किया ।
सम्मेलन में चार पुस्तकों 'अब वैसा न हो (डॉ. राम मनोहर राव), लज़्ज़त-ए-अलम (देवचंद्र भारती 'प्रखर'), सुलगती संवेदनाएँ (डॉ. बुद्धप्रिय सुरेश सौरभ गाजीपुरी) और जीवन के रंग (सुरेश कुमार 'राजा') का लोकार्पण किया गया । संगठन GOAL द्वारा सम्मेलन में उपस्थित समस्त अतिथिगण, वक्तागण एवं कविगण को उपहार स्वरूप स्मृति-चिन्ह, शाल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया ।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे GOAL के अध्यक्ष एवं 'आंबेडकरवादी साहित्य' पत्रिका के संरक्षक मा. डाॅ. राम मनोहर राव जी ने GOAL की स्थापना, उद्देश्य, उपलब्धियाँ एवं भविष्य योजना के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि GOAL की भविष्य योजना बाल साहित्य को समृद्ध करने की है ।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए GOAL के महासचिव साहित्यकार एवं समालोचक देवचंद्र भारती 'प्रखर' जी ने अतिथिगण, वक्तागण और श्रोतागण का धन्यवाद ज्ञापित किया । साथ ही उन्होंने GOAL की स्थापना से लेकर अब तक किये गये साहित्यिक कार्यक्रम एवं प्रदान किये जाने वाले साहित्यिक सम्मान का परिचय प्रस्तुत किया । उन्होंने बताया कि GOAL द्वारा प्रदान किया जाने वाला 'धम्म प्रहरी सम्मान' साहित्यिक, सामाजिक और धाम्मिक रूप से धम्म-प्रचार करने वाले लोगों को दिया जाता है । उन्होंने कहा कि 'आंबेडकरवादी साहित्य सम्मान' के लिए वही साहित्यकार पात्र होगा, जिसकी कम से कम एक पुस्तक प्रकाशित हो । आंबेडकरवादी चेतना का सस्पष्टीकरण करते हुए उन्होंने कहा कि किसी रचना में तथागत बुद्ध और बाबा साहेब का केवल नाम आ जाने से वह रचना आंबेडकरवादी नहीं हो सकती । उसमें आंबेडकरवादी चेतना का होना अनिवार्य है । आंबेडकरवादी रचना के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसमें बहुजन महापुरुषों का नाम आये । उन्होंने कहा कि GOAL केवल नाम का संगठन नहीं है, बल्कि काम का संगठन है ।
इस अवसर पर संजय कुमार 'दिनकर' (मीडिया प्रभारी GOAL), राधेश्याम, रामधनी राम, अमरेश कुमार, डॉ. साबिरा, आशीष कुमार सिंह दिव्यांश मोर्य, मनोरमा मानवी, राकेश यादव, नीलम भारती, राकेश कुमार भारती, चंद्रभान, राजीव सिंह, दिनेश कुमार भास्कर, अश्वनी कुमार, भानु प्रताप, किरन देवी, अभय कुमार, डॉ. चंदन प्रसाद, रजनीश कुमार आदि लोग उपस्थित रहे ।