चंदौली में शासन के टैगलाइन की खूब उड़ाई गई धज्जियां

बापू और शास्त्री जयंती पर नहीं दिखी क्वीज प्रतियोगिताएं, नहीं मना हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान उत्सव, प्रतिलिपित विभागों ने भी नहीं किया अनुपालन 

चंदौली में शासन के टैगलाइन की गुरुवार को खूब धज्जियां उड़ाई गई , बापू और शास्त्री के जयंती पर प्रार्थना सभा और ध्वजा रोहण के बाद क्वीज प्रतियोगिता नहीं दिखी और न ही हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान उत्सव मनाया गया. प्रतिलिपित विभागों ने भी नहीं किया अनुपालन. संविधान में निहित मूल मूल्यों को धरातल पर रेखांकित नहीं किया गया. शासन के सारे आदेश फाइलों तक ही सिमट कर रह गए. बाबा साहब के समर्थकों का मानना है कि शासन प्रशासन संविधान के सम्मान के प्रति काफी उदासीन है. जिससे संविधान के मूल्यों का जन जन तक पहुंच पाना असंभव दिख रहा है. आखिरकार इसका जिम्मेदार कौन होगा, देशभक्ति, राष्ट्रहित और संविधान सम्बंधित ज्ञान इस देश के भविष्य को कौन देगा ?


बता दें कि गांधी और शास्त्री जयंती को "हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान" के उत्सव के रूप में विविध कार्यक्रम आयोजित कर उनके आदर्शों और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, के योगदान को याद करना और उनके मूल्यों, जैसे सत्य, अहिंसा, एकता और राष्ट्र-निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने के साथ साथ स्वच्छता अभियान, संविधान की प्रस्तावना का वाचन, क्विज़ प्रतियोगिताएँ, और भाषण आयोजित करने धरातल पर रेखांकित करने के लिए सरकार द्वारा बाकायदा गाइड लाइन जारी कर प्रदेश के समस्त जिलाधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खण्ड शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया गया था. परन्तु शासन के इस प्रकार के निर्देशों का उनके ही अधिकारी अनुपालन नहीं कर रहे हैं. लोग संविधान का सम्मान करने से कतरा रहे हैं. 
बीते अंबेडकर जयंती पर भी हमारा स्वाभिमान हमारा स्वाभिमान उत्सव मनाने के लिए सम्पूर्ण प्रदेश भर में 15 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाने का शासन द्वारा टैगलाइन जारी किया गया था परन्तु उसका भी अनुपालन धरातल पर नहीं दिखा. संविधान के निर्माण में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान और संविधान में निहित मूल मूल्यों को धरातल पर रेखांकित नहीं किया गया. शासन के सारे आदेश फाइलों तक ही सिमट कर रह गए। बाबा साहब के समर्थकों का मानना है कि शासन प्रशासन संविधान के सम्मान के प्रति काफी उदासीन है. जिससे संविधान के मूल्यों का जन जन तक पहुंच पाना असंभव दिख रहा है।

आदेश में वर्णित कोई कार्यक्रम नहीं कराए गये, संविधान का नाम लेने से कतराते हैं अध्यापक- रामचंद्र राम 

गांधी और शास्त्री जयंती पर ऐसा नजारा जनपद के नौगढ़ क्षेत्र के कई विद्यालयों में देखा गया. शासन ने तो संविधान के सम्मान के लिए आदेश पर आदेश जारी कर उनके मूल मूल्यों को धरातल पर उतार कर जन जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है परंतु उनके ही कलम के सिपाही जिनके कन्धे पर संस्कार और राष्ट्रहित , देश भक्ति की भावना जाग्रत करने की जिम्मेदारी सौपी गयी वे सोते रहे. आखिरकार इसका जिम्मेदार कौन होगा, देशभक्ति, राष्ट्रहित और संविधान सम्बंधित ज्ञान इस देश के भविष्य को कौन देगा ?

 जिसका जनपद के भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के   पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं सहित बाबा साहब डॉ अंबेडकर के समर्थकों ने काफी4नाराजगी जाहिर किया. जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार, सिद्धार्थ प्राण बाहु, अर्जुन प्रसाद आर्य, अवधेश कुमार भारती, दिलबहार, बचाउ राम, मंगल, शिवानन्द गौतम, डॉ नन्दलाल महादेवन, संघर्ष सूर्यवंशी, सहित सैकड़ों समर्थकों ने काफी नाराजगी जाहिर किया है। 

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